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अपडेट………….. 《 06 》

अब तक,,,,,,

“ऐसा नहीं है।” अजय ने कहा__”क्योकि विराज ने तत्काल रिज़र्वेशन की तीन टिकटें ली थीं। रेलवे कर्मचारियों के पास इसका सबूत है कि उन्होने तत्काल रिजर्वेशन की तीन टिकटें ली थी मुम्बई के लिए।”

“तो फिर वो कहाॅ गायब हो गए?” शिवा ने कहा__”उन्हे ये जमीन खा गई या आसमान निगल गया?

“चिंता मत करो।” अजय सिंह ने कहा__”हम उन्हें जरूर ढूंढ् लेंगे।”

अब आगे,,,,,,,

उधर विराज अपनी माॅ और बहन को ट्रेन से उतार कर अब बस पकड़ चुका था। उसका खयाल था कि बस से वह किसी अन्य शहर जाएगा और फिर वहाॅ से किसी दूसरी ट्रेन से मुम्बई जाएगा।

“तुम हमें ट्रेन से उतार कर बस में क्यों लाए बेटा?” माॅ गौरी ने सबसे पहले यही सवाल पूछा था।

“ट्रेन में जाने से खतरा था माॅ।” विराज ने कहा__”बड़े पापा ने हमें पकड़ने के लिए अपने आदमी भेजे थे जो सभी जगह चेक कर रहे थे।”

“क् क्या..???” गौरी बुरी तरह चौंकी___”पर तुम्हें कैसे पता?”

“मुझे इस बात का पहले से अंदेशा था माॅ।” विराज ने कहा__”इस लिए मैंने अपने एक दोस्त को बड़े पापा की हर गतिविधि की खबर रखने के लिए कह दिया था फोन के जरिए। जब हम लोग ट्रेन मे बैठ कर चले थे तब तक ठीक था। आप जानती है ट्रेन वहा से निकलने के बाद एक जगह रुक गई थी और फिर छ: घंटे रुकी रही। क्योंकि उसमें कोई तकनीकी खराबी थी। मेरे दोस्त का फोन शाम को आया था उसने बताया कि बड़े पापा ने हमे ढूढ़ने के लिए हर जगह अपने आदमी भेज दिये हैं। मुझे पता था ट्रेन मे उनके आदमी हमे बड़ी आसानी से ढूढ़ लेंगे क्योकि उन्हे रेल कर्मचारियो से हमारे बारे में पता चल जाता और हम पकड़े जाते। इस लिए मैंने आप सबको ट्रेन से उतार कर किसी अन्य तरीके से मुम्बई ले जाने का सोचा।”

“आपने बहुत अच्छा किया भइया।”निधि ने कहा__”अब वो हमें नही ढूढ़ पाएंगे।”

“इतना लम्बा चक्कर लगाने का यही मतलब है कि वो हमें उस रूट पर ढूढ़ेगे जबकि हम यहा हैं।” विराज ने कहा__”मैं अकेला होता तो ये सब नही करता बल्कि खुल कर उन सबका मुकाबला करता मगर आप लोगों की सुरक्षा जरूरी थी।”

“अभी मुकाबला करने का समय नही है बेटा।” गौरी ने कहा__”जब सही समय होगा तब मैं खुद तुझे नही रोकूॅगी।”

“आप बस देखती जाओ माॅ।” विराज ने कहा__”कि अब क्या करता हूॅ मैं?”

“हाॅ भइया आप उन्हें छोंड़ना नहीं।” निधि ने कहा__”बहुत गंदे लोग हैं वो सब। हमे बहुत दुख दिया है उन्होने।”

“फिक्र मत कर मेरी गुड़िया।” विराज ने कहा__”मैं उन सबसे चुन चुन कर हिसाब लूॅगा।”

ऐसी ही बातें करते हुए ये लोग दूसरे दिन मुम्बई पहुॅच गए। विराज उन दोनो को सुरक्षित अपने फ्लैट पर ले गया। ये फ्लैट उसे कम्पनी द्वारा मिला था जिसमें दो कमरे एक ड्राइंग रूम एक डायनिंग रूम एक लेट्रिन बाथरूम तथा एक किचेन था। पीछे की तरफ बड़ी सी बालकनी थी। कुल मिलाकर इन सबके लिए इतना पर्याप्त था रहने के लिए।

विराज चूॅकि यहाॅ अकेला ही रहता था इस लिए वो साफ सफाई से ज्यादा मतलब नही रखता था। हलाॅकि सफाई वाली आती थी लेकिन वो सफाई नही करवाता था ऐसे ही रहता था। फ्लैट की गंदी हालत देख कर दोनो माॅ बेटी ने पहले फ्लैट की साफ सफाई की। विराज ने कहा भी कि सफर की थकान है तो पहले आराम कीजिए, सफाई का काम वह कल करवा देगा जब सफाई वाली बाई आएगी तो लेकिन माॅ बेटी न मानी और खुद ही साफ सफाई में लग गईं।

इस बीच विराज मार्केट निकल गया था किराना का सामान लाने के लिए। हलाकि कंपनी से रहने खाने का सब मिलता था लेकिन विराज बाहर ही होटल मे खाना खाता था। फ्लैट में गैस सिलेंडर और चूल्हा वगैरा सब था किन्तु राशन नही था। दो कमरों मे से एक कमरे में ही एक बेड था। किचेन बड़ा था जिसमें एक फ्रिज़ भी था। ड्राइंग रूम मे एक बड़ा सा एल सी डी टीवी भी था।

लगभग दो घंटे बाद विराज मार्केट से लौटा। उसने देखा कि फ्लैट की काया ही पलट गई है। हर चीज अपनी जगह ब्यवस्थित तरीके से रखी गई थी। विराज को इस तरह हर जगह आॅखें फाड़े देखता देख निधि ने कहा__”न आप खुद का खयाल रखते हैं और न ही किसी और चीज का। लेकिन अब ऐसा नही होगा, अब हम आ गए हैं तो आपका अच्छे से खयाल रखेंगे।”

“ओहो क्या बात है।”विराज मुस्कुराया__”हमारी गुड़िया तो बड़ी हो गई लगती है।”

“हाॅ तो?” निधि विराज के बगल से सट कर खड़ी हो गई__”देखिए आपके कंधे तक बड़ी हो गई हूॅ।”

“हाॅ हाॅ तू तो मेरी भी अम्मा हो गई है न।” गौरी ने कहा__”धेले भर की तो अकल है नहीं और बड़ी बड़ी बाते करने लगी है।”

“देखिए भइया जब देखो माॅ मुझे डाॅटती ही रहती हैं।”निधी ने बुरा सा मुह बनाते हुए कहा।

“मत डाॅटा कीजिए माॅ गुड़िया को।” विराज ने निधि को अपने सीने से लगाते हुए कहा__”ये जैसी भी है मेरी जान है ये।”

“सुन लिया न माॅ आपने?” निधि ने विराज के सीने से सिर उठा कर अपनी माॅ गौरी की तरफ देख कर कहा__”मैं भइया की जान हूॅ और हाॅ…भइया भी मेरी जान हैं…हाॅ नहीं तो।”

“अच्छा ठीक है बाबा।” गौरी ने हॅस कर कहा__”अब भाई को छोंड़ और जा जाकर नहा ले, फिर मुझे भी नहाना है और खाना भी बनाना है।”

“मैं खाना बाहर से ही ले आया हूॅ माॅ।” विराज ने कहा__”आप लोग खा पी कर आराम कीजिए कल से यहीं खाना पीना बनाना।”

“अब ले आया है तो चल कोई बात नहीं।” गौरी ने कहा__”लेकिन आज के बाद बाहर का खाना पीना बंद। ठीक है न??”

“जैसा आप कहें माॅ।” विराज ने कहा और सारा सामान अंदर किचन में रख दिया।

गौरी के कहने पर निधि नहाने चली गई। जबकि विराज वहीं ड्राइंग रूम में रखे सोफे पर बैठ गया। अचानक ही उसके चेहरे पर गंभीरता के भाव गर्दिश करने लगे थे। गौरी किचेन में सामान सेट कर रही थी।

विराज के मोबाइल पर किसी का काॅल आया। उसने मोबाईल की स्क्रीन पर फ्लैश कर रहे नाम को देखा तो होठों पर एक अजीब सी मुस्कान उभर आई।

“मैं आ गया हूॅ।” विराज ने कहा__”और अब मैं तैयार हूॅ उस काम के लिए, बोलो कहाॅ मिलना है?””

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“ठीक है फिर।” विराज ने कहा और फोन काट दिया। ‘अजय सिंह बघेल अब अपनी बरबादी के दिन गिनने शुरू कर दे क्योकि अब विराज दि ग्रेट का क़हर तुम पर और तुमसे जुड़ी हर चीज़ पर टूटेगा’

अपडेट हाज़िर है दोस्तो,,,,,,,

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