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“ऐसा कैसे हो सकता है?”अजय सिंह गुर्राया__”वो लोग ट्रेन से कैसे गायब हो गए? तुम उन्हें ढूॅढ़ो और शीघ्र हमारे पास लेकर आओ वरना ठीक नहीं होगा समझे?”

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“अरे जाएगे कहाॅ?” अजय ने कहा__”ठीक से ढूॅढ़ो उन्हें।” कहने के साथ ही अजय ने फोन काट दिया।

“क्या हुआ?” प्रतिमा ने पूछा__”किससे बात कर रहे थे आप?”

“डीसीपी अशोक पाठक से।” अजय ने बताया__”उसका कहना है कि विराज अपनी माॅ और बहन सहित ट्रेन से गायब हैं।”

“क् क्या…???” प्रतिमा और शिवा एक साथ उछल पड़े___”ऐसा कैसे हो सकता है भला? वो सब मुम्बई के लिए ही निकले थे।”

“हो सकता है कि वो लोग ट्रेन में बैठे ही न हों।” प्रतिमा ने सोचने वाले भाव से कहा__”कदाचित उन्हे ये अंदेशा रहा हो कि उनकी करतूत का पता चलते ही उन्हे पकड़ने के लिए आप उनके पीछे पुलिस को या अपने आदमियों को लगा देंगे। इस लिए वो ट्रेन से सफर करना बेहतर न समझे हों।”

“ऐसा नहीं है।” अजय ने कहा__”क्योकि विराज ने तत्काल रिज़र्वेशन की तीन टिकटें ली थीं। रेलवे कर्मचारियों के पास इसका सबूत है कि उन्होने तत्काल रिजर्वेशन की तीन टिकटें ली थी मुम्बई के लिए।”

“तो फिर वो कहाॅ गायब हो गए?” शिवा ने कहा__”उन्हे ये जमीन खा गई या आसमान निगल गया?

“चिंता मत करो।” अजय सिंह ने कहा__”हम उन्हें जरूर ढूंढ् लेंगे।”

अपडेट हाज़िर है दोस्तो,,,,,,,

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