एक नया संसार – Update 5A | Incest Story

एक नया संसार - Erotic Incest Sex Story
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अपडेट……… 《 05 》

अब तक…..

विराज का चेहरा एकाएक पत्थर की तरह शख्त हो गया। मन ही मन उसने शायद कोई संकल्प सा ले लिया था। आखों में खून सा उतरता हुआ नजर आया। नथुने फूलने पिचकने लग गए थे। सहसा गौरी की नजर अपने बेटे पर पड़ी। बेटे की हालत का अंदाजा होते ही उसकी आखें भर आईं। उसने शीघ्रता से विराज को अपने सीने में छुपा लिया। माॅ का ह्रदय ममता के विसाल सागर से भरा होता है जिसकी ठंडक से तुरंत ही विराज शान्त हो गया। ‘फिक्र मत कीजिए माॅ अब ऐसा तांडव होगा कि हमारा बुरा करने वालों की रूह काॅप जाएगी।’ विराज ने मन ही मन कहा और अपनी आखें बंद कर ली।

अब आगे…….

विराज अपनी माॅ और बहन को लेकर मुम्बई के लिए निकल चुका था। जबकि यहाॅ हवेली में माहौल बड़ा ही गर्म था। शिवा का जब शाम तक कोई अता पता न चला तो उसके पिता अजय सिंह तथा माॅ प्रतिमा को चिंता हुई। अजय सिंह ने अपने आदमियों को शिवा की तलाश मे पूरे गाॅव तथा आस पास के गावों में भेज दिया और खुद अपने खेत में बने मकान की तरफ चल दिया। उसके साथ कुछ आदमी और थे।

अजय सिंह अपनी वकील की नौकरी छोंड़ चुका था। अब वह बिजनेस मैन था तथा सारी जमीनों पर मजदूरों द्वारा फसल उगाता था। उसने अपने सबसे छोटे भाई अभय को भी अपनी तरफ कर लिया था। ये कैसे हुआ ये तो खैर बाद में पता चलेगा।

अजय सिंह अपने आदमियों के साथ जब खेत वाले मकान पर पहुचा तो वहा का नजारा देख कर हक्का बक्का रह गया। मकान में जो कमरा विराज की माॅ और उसकी बहन के लिए दिया गया था वो खुला पड़ा था और बाहर शिवा की मोटर साईकिल एक तरफ पड़ी थी। कुछ दूरी पर अजय सिंह का बेटा अधमरी हालत मे पड़ा था खून से तथपथ। अपने बेटे की ऐसी हालत देख कर अजय सिंह की मानो नानी मर गई।

अजय सिंह को समझ न आया कि उसके बेटे की ये हालत कैसे हो गई? उसने शीघ्र ही अपने बेटे को उठाया और अपनी गोंद मे लिया। एक आदमी जल्दी ही ट्यूब बेल से पानी लाया और शिवा के चेहरे पर हल्के हल्के छिड़का। थोड़ी ही देर मे शिवा को होश आ गया। अजय सिंह ने अपने आदमियों से कह कर उसे अपनी कार मे बिठाया और हास्पिटल की तरफ बढ़ गया।

रास्ते में अजय सिंह के पूछने पर शिवा ने सुबह की सारी राम कहानी अपने पिता को बताई। अजय सिंह ये जान कर चौंका कि उसका भतीजा विराज यहा आया था और उसने ही शिवा की ये हालत की है। इतना ही नही वो ये सब करने के बाद उसकी जानकारी में आए बग़ैर बड़ी आसानी से अपनी माॅ और बहन को अपने साथ ले भी गया। अजय सिंह को ये सब जानकर बेहद गुस्सा आया। उसने तुरंत ही किसी को फोन लगाया और कुछ देर बात करने के बाद फोन काट दिया।

“तुम फिक्र मत करो बेटे।” फिर उसने शिवा से कहा__”बहुत जल्द वो हरामज़ादा तुम्हारे कदमों के नीचे होगा। मैंने पुलिस को इनफार्म कर दिया है और कह दिया है कि उन सबको किसी भी हालत में पकड़ कर हमारे पास ले कर आएॅ।”

“उस कमीने ने मुझे बहुत मारा है डैड।” शिवा ने कराहते हुए अपने पिता से कहा__”मैं उसे छोड़ूॅगा नहीं, जान से मार दूॅगा उस हरामजादे को।”

“चिन्ता मत करो बेटे।” अजय सिंह ने भभकते हुए लहजे में कहा था__”सबका हिसाब देना पड़गा उसे। अभी तक मै नरमी से पेश आ रहा था। मगर अब मै उन्हें दिखाऊगा कि मुझसे और मेरे बेटे से उलझने का अंजाम क्या होता है?”

“मालिक हम हास्पिटल पहुॅच गए हैं।” ड्राइविंग करते हुए एक आदमी ने कहा।

उस आदमी की बात सुन कर अजय सिंह ने कार से उतर कर शिवा को भी सहारा देकर नीचे उतारा और हास्पिटल के अंदर की तरफ बढ़ गया।

एक घंटे बाद अजय सिंह अपने बेटे के साथ हवेली मे पहुचा। शिवा की हालत अब बेहतर थी क्योकि हास्पिटल में उसकी ड्रेसिंग हो गई थी। अजय सिंह ने अपनी पत्नी प्रतिमा को सब बताया कि क्या क्या हो गया है आज। सारी बाते सुन कर प्रतिमा की भी भृकुटी तन गई। उसने तो सर पर आसमान ही उठा लिया।

“ये सब आपकी वजह से हो रहा है।” प्रतिमा ने गुस्से से कहा__”मैं तो उस दिन भी कह रही थी कि नाग नागिन और उनके सॅपोलों को कुचल दीजिए मगर आप ही नहीं माने।”

“धीरे बोलो प्रतिमा।” अजय ने सहसा तपाक से बोला__”दीवारों के भी काॅन होते हैं।”

“मुझे किसी की परवाह नही है।” प्रतिमा ने कहा__”आज अगर मेरे बेटे को कुछ हो जाता तो आग लगा देती इस हवेली को।”

“मैने उनका इंतजाम कर दिया है।”अजय सिंह ने कहा__”वो हमसे बच कर कहीं नही जा पाएंगे। बस इंतजार करो वो सब तुम्हारे सामने होंगे फिर जो दिल करे करना उन सबके साथ।”

“डैड मैं तो बस निधि को चाहता हू।” शिवा कमीने ढंग से मुस्कुराया था बोला__”बाकी का आप और माॅम जानो।”

“जो कुछ करना सोच समझ कर करना बेटे।” अजय सिंह ने राजदाराना लहजे में कहा__”तुम्हारे दादा दादी की चिन्ता नहीं है हमें। बस अपने चाचा अभय से जरा सावधान रहना। उसे ये सब पता न चल पाए कि हम क्या कर रहे हैं? हमने बड़ी मुश्किल से उसे अपनी तरफ किया है।”

“वो तो ठीक है डैड।” शिवा ने कहा__”लेकिन ऐसा कब तक चलेगा? आखिर चाचा लोगो को हम अपने सभी कामों मे शामिल कब करेंगे?”

“बेटा ये इतना आसान नहीं है।” अजय ने कहा__”तुम्हारे चाचा और चाची लोग जरा अलग तबियत के हैं।”

“अगर ऐसा नही हो सकता तो।” प्रतिमा ने कहा__”तो फिर हमारे पास एक ही रास्ता है।”

“हमें कोशिश करते रहना चाहिए।”अजय ने कहा__”तुम भी करुणा पर कोशिश करती रहो।”

तभी अजय का मोबाइल बजा।

“लो लगता है उन लोगों को ढूॅढ़ लिया गया है।” अजय सिंह ने अपनी कोट की जेब से मोबाइल निकालते हुए कहा और मोबाइल की काॅल को रिसीव कर कान से लगा लिया। उधर से जाने क्या कहा गया जिसे सुन कर अजय सिंह के चेहरे पर गुस्से के भाव आ गए।

कहानी जारी रहेगी,,,,,,,

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