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♡ एक नया संसार ♡

अपडेट………《 27 》

अब तक,,,,,,,

“अच्छी बात है प्रतिमा।” अजय सिंह ने ठंडे स्वर में कहा__”अब तुम कुछ नहीं करोगी। जो भी करुॅगा अब मैं ही करूॅगा।”

“न नहीं नहीं अजय।” प्रतिमा बुरी तरह घबरा गई, बोली__”तुम खुद से कुछ नहीं करोगे। मैं अतिसीघ्र ही अपनी बेटी को तुम्हारे नीचे सुलाने के लिए तैयार कर लूॅगी।”

“अब तुम्हारी इन बातों पर ज़रा भी यकीन नहीं है मुझे।” अजय ने कहा__”बहुत देख ली तुम्हारी कोशिशें। तुमने करुणा के बारे में भी यही कहा था और अब अपनी बेटी के लिए भी यही कह रही हो। तुम्हारी कोशिशों का क्या नतीजा निकलता है ये मैं देख चुका हूॅ। इस लिए अब मैं खुद ये काम करूॅगा और तुम मुझे रोंकने की कोशिश नहीं करोगी।”

“पर अजय ये तुम ठीक…।” प्रतिमा का वाक्य बीच में ही रह गया।

“बस प्रतिमा, अब कुछ नहीं सुनना चाहता हूॅ मैं।” अजय सिंह कह उठा__”अब तुम सिर्फ देखो और उसका मज़ा लो।”

प्रतिमा देखती रह गई अजय को। उसका दिल बुरी तरह घबराहट के कारण धड़कने लगा था। चेहरा अनायास ही किसी भय के कारण पीला पड़ गया था उसका। मन ही मन ईश्वर को याद कर उसने अपनी बेटी की सलामती की दुवा की।

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अब आगे,,,,,,,,

अभय को अपने साथ लिए गौरी ड्राइंग रूम में दाखिल हुई, उसके पीछे पीछे विराज और निधि भी थे। गौरी ने अभय को सोफे पर बैठाया और खुद भी उसी सोफे पर उसके पास बैठ गई। विराज और निधि सामने वाले सोफे पर एक साथ ही बैठ गये।

अभय सिंह का मन बहुत भारी था। उसका सिर अभी भी अपराध बोझ से झुका हुआ था। गौरी इस बात को बखूबी समझती थी, कदाचित इसी लिए उसने बड़े प्यार से अपने एक हाथ से अभय का चेहरा ठुड्डी से पकड़ कर अपनी तरफ किया।

“ये क्या है अभय?” फिर गौरी ने अधीरता से कहा__”इस तरह सिर झुका कर बैठने की कोई आवश्यकता नहीं है। तुम अपने दिलो दिमाग़ से ऐसे विचार निकाल दो जिसकी वजह से तुम्हें ऐसा लगता है कि तुमने कोई अपराध किया है। तुम्हारी जगह कोई दूसरा होता तो वह भी वही करता जो उन हालातों में तुमने किया। इस लिए मैं ये समझती ही नहीं कि तुमने कोई ग़लती की है या कोई अपराध किया है। इस लिए अपने मन से ये ख़याल निकाल दो अभय और अपने दिल का ये बोझ हल्का करो, जो बोझ अपराध बोझ बन कर तुम्हें शान्ति और सुकून नहीं दे पा रहा है।”

“भाभी आप तो महान हैं इस लिए इस सबसे आप पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।” अभय ने भारी स्वर में कहा__”किन्तु मैं आप जैसा महान नहीं हूॅ और ना ही मेरा हृदय इतना विशाल है कि उसमें किसी तरह के दुख सहजता से जज़्ब हो सकें। मैं तो बहुत ही छोटी बुद्धि और विचारों वाला हूॅ जिसे कोई भी ब्यक्ति जब चाहे और जैसे भी चाहे अपनी उॅगलियों पर नचा देता है। शायद इसी लिए तो….इसी लिए तो मैं समझ ही नहीं पाया कि कभी कभी जो दिखता है या जो सुनाई देता है वह सिरे से ग़लत भी हो सकता है।”

“ये तुम कैसी बातें कर रहे हो अभय?” गौरी ने दुखी भाव से कहा__”भगवान के लिए ऐसा कुछ मत कहो। अपने अंदर ऐसी ग्लानी मत पैदा करो और ना ही इन सबसे खुद को इस तरह दुखी करो।”

“मुझे कहने दीजिए भाभी।” अभय ने करुण भाव से कहा__”शायद ये सब कहने से मेरे अंदर की पीड़ा में कुछ इज़ाफा हो। आप तो मुझे सज़ा नहीं दे रही हैं तो कम से कम मैं खुद तो अपने आपको सज़ा और तकलीफ़ दे लूॅ। मुझे भी तो इसका एहसास होना चाहिए न भाभी कि जब हृदय को पीड़ा मिलती है तो कैसा लगता है? हमारे अपने जब अपनों को ही ऐसी तक़लीफ़ देते हैं तो उससे हमारी अंतर्आत्मा किस हद तक तड़पती है?”

“नहीं अभय नहीं।” गौरी ने रोते हुए अभय को एक बार फिर से खींच कर खुद से छुपका लिया, बोली__”ऐसी बातें मत करो। मैं नहीं सुन सकती तुम्हारी ये करुण बातें। मैंने तुम्हें अपने बेटे की तरह हमेशा स्नेह दिया है। भला, मैं अपने बेटे को कैसे इस तरह तड़पते हुए देख सकती हूॅ? हर्गिज़ नहीं….।”

देवर भाभी का ये प्यार ये स्नेह ये अपनापन आज ढूॅढ़ने से भी शायद कहीं न मिले। विराज और निधि आॅखों में नीर भरे उन्हें देखे जा रहे थे। कितनी ही देर तक गौरी अभय को खुद से छुपकाए रही। सचमुच इस वक्त ऐसा लग रहा था जैसे अभय दो दो बच्चों का बाप नहीं बल्कि कोई छोटा सा अबोध बालक हो।

“राज।” सहसा गौरी ने विराज की तरफ देख कर कहा__”तुम अपने चाचा जी को उनके रूम में ले जाओ। लम्बे सफर की थकान बहुत होगी। नहा धो कर फ्रेस हो जाएॅगे तो मन हल्का हो जाएगा।”

“जी माॅ।” विराज तुरंत ही सोफे से उठ कर अभय के पास पहुॅच गया। गौरी के ज़ोर देने पर अभय को विराज के साथ कमरे में जाना ही पड़ा। जबकि अभय और विराज के जाने के बाद गौरी उठी और अपनी आॅखों से बहते हुए आॅसुओं को पोंछते हुए किचेन की तरफ बढ़ गई। 

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हवेली में डोर बेल की आवाज़ सुनकर प्रतिमा ने जाकर दरवाजा खोला। दरवाजे के बाहर खड़े जिस चेहरे पर उसकी नज़र पड़ी उसे देख कर वह बुरी तरह चौंकी।

“अरे नैना तुम??” प्रतिमा का हैरत में डूबा हुआ स्वर__”आओ आओ अंदर आओ। आज इतने महीनों बाद तुम्हें देख कर मुझे बेहद खुशी हुई।”

दोस्तो ये नैना है….आप सबको तो बताया ही जा चुका है परिवार के सभी सदस्यों के बारे में। फिर भी अगर आप भूल गए हैं तो आप एक बार इस कहानी का पहला अपडेट चेक कर सकते हैं। पहले अपडेट में आपको पता चल जाएगा कि नैना कौन है?

नैना जैसे ही दरवाजे के अंदर आई प्रतिमा ने उसे अपने गले से लगा लिया। प्रतिमा ने महसूस किया कि नैना के हाव भाव बदले हुए हैं। प्रतिमा की बात का उसने मुख से कोई जवाब नहीं दिया था बल्कि वह सिर्फ हल्का सा मुस्कुराई थी। उसकी मुस्कान भी शायद बनावटी ही थी। क्योंकि चेहरे के भाव उसकी मुस्कान से बिलकुल अलग थे।

“दामाद जी कहाॅ हैं?” नैना से अलग होकर प्रतिमा ने दरवाजे के बाहर झाॅकने के बाद पूछा था।

“मैं अकेली ही आई हूॅ भाभी।” नैना ने अजीब भाव से कहा__”सब कुछ छोंड़ कर।”

“क्याऽऽ???” नैना की बात सुनकर प्रतिमा ने चौंकते हुए कहा__”सब कुछ छोंड़ कर से क्या मतलब है तुम्हारा??

“मैंने आदित्य को तलाक दे दिया है।” नैना ने कठोरता से कहा__”अब उससे और उसके घर वालों से मेरा कोई रिश्ता नहीं रहा।”

“त तलाऽऽक????” प्रतिमा बुरी तरह उछल पड़ी__”ये क्या कह रही हो तुम?”

“हाॅ भाभी।” नैना ने कहा__”मैने उस बेवफा को तलाक दे दिया है, और उससे सारे रिश्ते नाते तोड़ कर वापस अपने माॅ बाप व भइया भाभी के पास आ गई हूॅ।”

प्रतिमा की अजीब हालत हो गई उसकी बातें सुनकर। हैरत व अविश्वास से मुह फाड़े वह अपनी छोटी ननद नैना को अपलक देखे जा रही थी। फिर सहसा उसकी तंद्रा तब भंग हुई जब उसके कानों में अंदर से आई उसके पति अजय की आवाज़ गूॅजी। अंदर से अजय सिंह ने आवाज़ लगा कर पूछा था कि कौन आया है बाहर?

अजय सिंह की आवाज़ से प्रतिमा को होश आया जबकि नैना अपने हाॅथ में पकड़ा हुआ बड़ा सा बैग वहीं छोंड़ कर अंदर की तरफ भागी। नैना को इस तरह भागते देख प्रतिमा चौंकी फिर पलट कर पहले दरवाजे को बंद किया उसके बाद नैना के बैग को उठा अंदर की तरफ बढ़ गई।

उधर भागते हुए नैना ड्राइंग रूम में पहुॅची। उसी समय अजय सिंह भी अपने कमरे से इधर ही आता दिखा। नैना अपने बड़े भाई को देख एक पल को ठिठकी फिर तेज़ी से दौड़ती हुई जा कर अजय सिंह से लिपट गई। 

“भइयाऽऽ।” नैना अजय से लिपट कर बुरी तरह रोने लगी थी। अजय सिंह उसे इस तरह देख पहले तो चौंका फिर उसे अपनी बाॅहों में ले प्यार व स्नेह से उसके सिर व पीठ पर हाॅथ फेरने लगा।

“अरे क्या हुआ तुझे?” अजय सिंह उसकी पीठ को सहलाते हुए बोला__”इस तरह क्यों रोये जा रही है तू?”

अजय सिंह के इस सवाल का नैना ने कोई जवाब नहीं दिया, बल्कि वह ज़ार ज़ार वैसी ही रोती रही। नैना अपने भाई के सीने से कस के लगी हुई थी। ऐसा लगता था जैसे उसे इस बात का अंदेशा था कि अगर वह अपने भाई से अलग हो जाएगी तो कयामत आ जाएगी।

प्रतिमा भी तब तक पहुॅच गई थी। अपने भाई से लिपटी अपनी ननद को इस तरह रोते देख उसकी आॅखों में भी पानी आ गया। काफी देर तक यही आलम रहा। अजय सिंह ने उसे बड़ी मुश्किल से चुप कराया। फिर उसे उसके कंधे से पकड़ कर चलते हुए आया और उसे सोफे पर आराम से बैठा कर खुद भी उसके पास ही बैठ गया।

“प्रतिमा दामाद जी कहाॅ हैं?” फिर अजय ने प्रतिमा की तरफ देखते हुए पूछा__”उन्हें अपने साथ अंदर क्यों नहीं लाई तुम?”

“दामाद जी नहीं आए अजय।” प्रतिमा ने गंभीरता से कहा__”नैना अकेली ही आई है।”

“क्या???” अजय चौंका__”लेकिन क्यों? दामाद जी साथ क्यों नहीं आए? मेरी फूल जैसी बहन को अकेली कैसे आने दिया उन्होंने? रुको मैं अभी बात करता हू उनसे।”

“अब फोन करने की कोई ज़रूरत नहीं है अजय।” प्रतिमा ने कहा__”नैना अब हमारे पास ही रहेगी….।”

“हमारे पास ही रहेगी??” अजय चकराया, बोला__”इसका क्या मतलब हुआ भला?”

“वो…वो नैना ने दामाद जी को तलाक दे दिया है।” प्रतिमा ने धड़कते दिल के साथ कहा__”इस लिए अब ये यहीं रहेंगी।”

“व्हाऽऽट???” अजय सिंह सोफे पर बैठा हुआ इस तरह उछल पड़ा था जैसे उसके पिछवाड़े के नीचे सोफे का वह हिस्सा अचानक ही किसी बड़ी सी नोंकदार सुई में बदल गया हो, बोला__”ये सब क्या…ये तुम क्या कह रही हो प्रतिमा? नैना ने दामाद जी को तलाक दे दिया है? अरे लेकिन क्यों??”

प्रतिमा के कुछ बोलने से पहले ही नैना एक झटके से उठी और रोते हुए अंदर की तरफ भाग गई। अजय सिंह मूर्खों की तरह उसे जाते देखता रहा।

“प्रतिमा सच सच बताओ।” फिर अजय ने उद्दिग्नता से कहा__”आख़िर ऐसी क्या बात हो गई है जिसकी वजह से नैना ने दामाद जी को तलाक दे दिया है?”

“सारी बातें मुझे भी नहीं पता अजय।” प्रतिमा ने कहा__”नैना ने अभी कुछ भी नहीं बताया है इस बारे में।”

“उससे पूछो प्रतिमा।” अजय सिंह ने कहा__”उससे पूछो कि क्या मैटर है? उसने अपने पति को किस बात पर तलाक दे दिया है?”

“ठीक है मैं बात करती हूॅ उससे।” प्रतिमा कहने के साथ ही उठ कर उस दिशा की तरफ बढ़ गई जिधर नैना गई थी। जबकि अजय सिंह किसी गहरी सोच में डूबा नज़र आने लगा था।

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“मिस्टर चौहान।” हास्पिटल की गैलरी पर दीवार से सटी बेंच पर बैठे एक ऐसे शख्स के कानों से ये वाक्य टकराया जिसके चेहरे पर इस वक्त गहन परेशानी व दुख के भाव थे। उसने सिर उठा कर देखा। उसके सामने एक डाक्टर खड़ा उसी की तरफ संजीदगी से देख रहा था।

“मिस्टर चौहान।” डाक्टर ने कहा__”प्लीज आप मेरे साथ आइए। मुझे आपसे कुछ ज़रूरी बातें करनी है।”

“डाक्टर मेरी बेटी कैसी है अब?” बेन्च से एक ही झटके में उठते हुए उस शख्स ने हड़बड़ाहट से पूछा था__”वो अब ठीक तो है ना?”

“अब वो बिलकुल ठीक है मिस्टर चौहान लेकिन।” डाक्टर का वाक्य अधूरा रह गया।

“ल लेकिन क्या डाक्टर?” शख्स ने असमंजस से पूछा।

“आप प्लीज़ मेरे साथ आइए।” डाक्टर ने ज़ोर देकर कहा__”मुझे आपसे अकेले में बात करनी है। प्लीज़ कम हेयर…।”

कहने के साथ ही डाक्टर एक तरफ बढ़ गया। उसे जाते देख वो शख्स भी तेज़ी से उसके पीछे लपका। चेहरे पर हज़ारों तरह के भाव एक पल में ही गर्दिश करते नज़र आने लगे थे उसके। कुछ ही देर में डाक्टर के पीछे पीछे वह उसके केबिन में पहुॅचा। 

“मिस्टर चौहान।” डाक्टर अपनी चेयर के पास पहुॅच कर तथा अपने सामने बड़ी सी टेबल के पार रखीं चेयर की तरफ हाथ के इशारे के साथ कहा__”हैव ए सीट प्लीज़।”

डाक्टर के कहने पर वो शख्स जिसे डाक्टर उसके सर नेम से संबोधित कर रहा था किसी यंत्रचालित सा आगे बढ़ा और एक हाथ से चेयर को पीछे कर उसमें बैठ गया। उसके बैठ जाने के बाद केबिन में दोनो के बीच कुछ देर के लिए ख़ामोशी छाई रही।

“कहो डाक्टर।” फिर खामोशी को चीरते हुए उस शख्स ने भारी स्वर में कहा__”क्या ज़रूरी बातें करनी थी आपको?”

“मिस्टर चौहान।” डाक्टर ने भूमिका बनाते हुए किन्तु संतुलित लहजे में कहा__”मैं चाहता हूॅ कि आप मेरी बातों को शान्ती और बड़े धैर्य के साथ सुनें।”

“आख़िर बात क्या है डाक्टर?” शख्स ने सहसा अंजाने भय से घबरा कर कहा था, बोला__”मुझे पता है कि मेरी बेटी के साथ किसी ने रेप किया है जिसकी वजह से उसकी आज ये हालत है। मैं धरती आसमान एक कर दूॅगा उस हरामज़ादे को ढूढ़ने में जिसने मेरी बेटी को आज इस हालत में पहुॅचाया है। उसे ऐसी मौत दूॅगा कि फरिश्ते भी देख कर थर थर काॅपेंगे।”

“प्लीज़ कंट्रोल योरसेल्फ मिस्टर चौहान प्लीज।” डाक्टर ने कहा__”आपको इसके आगे जो भी करना हो आप करते रहियेगा, लेकिन उसके पहले शान्ती और धैर्य के साथ आप मेरी बातें सुन लीजिए।”

“ठीक है कहिए।” उस शख्स ने गहरी साॅस ली।

“ये तो आप जानते ही हैं कि आपकी बेटी के साथ क्या हुआ है।” डाक्टर ने कहा__”पर ये आधा सच है।”

“क्या मतलब?” चौहान चौंका।

“आपकी बेटी के साथ एक से ज्यादा लोगों ने रेप की वारदात को अंजाम दिया है?” डाक्टर ने संजीदगी से कहा__”उसने खुद शराब पी थी या फिर उसे पिलाई गई थी। ऐसी शराब जिसमें ड्रग्स मिला हुआ था। इससे यही साबित होता है कि ये सब जिन लोगों ने भी किया है पहले से ही सोच समझकर किया है।”

“ये आप क्या कह रहे हैं डाक्टर?” चौहान की हालत खराब थी, बोला__”मेरी बेटी के साथ इतना कुछ किया उन हरामज़ादों ने।”

“ये सब तो कुछ भी नहीं है।” डाक्टर ने गंभीरता से कहा__”बल्कि अब जो बात मैं आपको बताना चाहता हूॅ वो बहुत ही गंभीर बात है। मैं चाहता हूॅ कि आप मेरी उस बात को सुनकर अपना धैर्य नहीं खोएंगे।”

“आख़िर ऐसी क्या बात है डाक्टर?” चौहान हतोत्साहित सा बोला__”क्या कहना चाहते हैं आप? साफ साफ बताओ क्या बात है?”

“आपकी बेटी प्रेग्नेन्ट है।” डाक्टर ने मानो धमाका सा किया था__”वह भी दो महीने की।”

“क्याऽऽ????” चेयर पर बैठा चौहान ये सुन कर उछल पड़ा था, बोला__”ये आप क्या कह रहे हैं डाक्टर? ऐसा कैसे हो सकता है?”

“इस बारे में भला मैं कैसे बता सकता हूॅ मिस्टर चौहान?” डाक्टर ने कहा__”ये तो आपकी बेटी को ही पता होगा। मैंने तो आपको वही बताया है जो आपकी बेटी की जाॅच से हमें पता चला है।”

चौहान भौचक्का सा डाक्टर को देखता रह गया था। उसके दिलो दिमाग़ में अभी तक धमाके हो रहे थे। असहाय अवस्था में बैठा रह गया था वह।

तभी केबिन का गेट खुला और एक नर्स अंदर दाखिल हुई।

“सर वो पुलिस बाहर आपका इन्तज़ार कर रही है।” नर्स ने डाक्टर की तरफ देख कर कहा था।

“ठीक है हम आते हैं।” डाक्टर ने उससे कहा फिर चौहान की तरफ देख कर कहा__”मिस्टर चौहान आइए चलते हैं।”

उसके बाद दोनो केबिन के बाहर आ गए। चौहान के चेहरे से ही लग रहा था कि वह दुखी है, किन्तु अपने इस दुख को वह जज़्ब करने की कोशिश कर रहा था।

बाहर गैलरी में आते ही डाक्टर को पुलिस के कुछ शिपाही दिखाई दिये। वह चौहान के साथ चलता हुआ रिसेशन पर पहुॅचा। जहाॅ पर इंस्पेक्टर की वर्दी में रितू खड़ी थी। सिर पर पी-कैप व दाहिने हाॅथ में पुलिसिया रुल था जिसे वह कुछ पलों के अन्तराल में अपनी बाॅई हथेली पर हल्के से मार रही थी।

“हैलो इंस्पेक्टर।” डाक्टर रितू के पास पहुॅचते ही बोला था।

“क्या उस लड़की को होश आ गया डाक्टर?” रितू ने पुलिसिया अंदाज़ में पूछा__”मुझे उसका स्टेटमेन्ट लेना है।”

“मिस रितू।” डाक्टर ने कहा__”बस कुछ ही समय में उसे होश आ जाएगा फिर आप उसका बयान ले सकती हैं।” डाक्टर ने कहने के साथ ही चौहान की तरफ इशारा करते हुए कहा__”ये उस लड़की के पिता हैं। मिस्टर शैलेन्द्र चौहान।”

“ओह आई सी।” रितू ने चौहान की तरफ देखते हुए कहा__”मुझे दुख है अंकल कि आपकी बेटी के साथ ऐसा हादसा हुआ?”

“सब भाग्य की बातें हैं बेटा।” चौहान ने हारे हुए खिलाड़ी की तरह बोला__”हम चाहे सारी ऊम्र सबके साथ अच्छा करते रहें और सबका अच्छा भला सोचते रहें लेकिन हमें हमारे भाग्य से जो मिलना होता है वो मिल ही जाता है।”

“हाॅ ये तो है अंकल।” रितू ने कहा__”ख़ैर, आपकी बेटी का ये केस फाइल हो चुका है, बस आपके साइन की ज़रूरत है। लड़की के बयान के बाद पुलिस इस केस को अच्छी तरह देख लेगी। जिसने भी इस घिनौने काम को अंजाम दिया है उसको बहुत जल्द जेल की सलाखों के पीछे अधमरी अवस्था में पाएंगे आप।”

“उससे क्या होगा बेटी?” चौहान ने गंभीरता से कहा__”क्या वो सब वापस हो जाएगा जो लुट गया या बरबाद हो गया है?”

“आप ये कैसी बातें कर रहे हैं अंकल?” रितू ने हैरत से कहा__”क्या आप नहीं चाहते कि जिसने भी आपकी बेटी के साथ ये किया है उसे कानून के द्वारा शख्त से शख्त सज़ा मिले?”

“उसे कानून नहीं।” चौहान के चेहरे पर अचानक ही हाहाकारी भाव उभरे__”उसे मैं खुद अपने हाथों से सज़ा दूॅगा। तभी मेरी और मेरी बेटी की आत्मा को शान्ती मिलेगी।”

“तो क्या आप कानून को हाथ में लेंगे?” रितू ने कहा__”नहीं अंकल, ये पुलिस केस है और उसे कानूनन ही सज़ा प्राप्त होगी।”

“तुम अपना काम करो बेटी।” चौहान ने कहा__”और मुझे मेरा काम अपने तरीके से करना है।”

तभी वहाॅ पर एक नर्स आई। उसने बताया कि उस लड़की को होश आ गया है और उसे दूसरे रूम में शिफ्ट कर दिया गया है। नर्स की बात सुनकर डाक्टर ने रितू को उससे बयान लेने की परमीशन दी किन्तु ये भी कहा कि पेशेन्ट को ज्यादा किसी बात के लिए मजबूर न करें। चौहान साथ में जाना चाहता था किन्तु रितू ने ये कह कर उसे रोंक लिया कि ये पुलिस केस है इस लिए पहले पुलिस उससे मिलेगी और उसका बयान लेगी।

इंस्पेक्टर रितू अपने साथ एक महिला शिपाही को लिए उस कमरे में पहुॅची जिस कमरे में उस लड़की को शिफ्ट किया गया था। डाक्टर खुद भी साथ आया था। किन्तु फिर एक नर्स को कमरे में छोंड़ कर वह बाहर चला गया था।

हास्पिटल वाले बेड पर लेटी वह लड़की आॅखें बंद किये लेटी थी। ये अलग बात है कि उसकी बंद आॅखों की कोरों से आॅसूॅ की धार सी बहती दिख रही थी। उसके शरीर का गले से नीचे का सारा हिस्सा एक चादर से ढ्का हुआ था। कमरे में कुछ लोगों के आने की आहट से भी उसने अपनी आॅखें नहीं खोली थी। बल्कि उसी तरह पुर्वत् लेटी रही थी वह।

“अब कैसी तबियत है तुम्हारी?” रितू उसके करीब ही एक स्टूल पर बैठती हुई बोली थी। उसके इस प्रकार पूॅछने पर लड़की ने अपनी आॅखें खोली और रितू की तरफ चेहरा मोड़ कर देखा उसे। रितू पर नज़र पड़ते ही उसकी आॅखों में हैरत के भाव उभरे। ये बात रितू ने भी महसूस की थी।

“अब कैसा फील कर रही हो?” रितु ने पुनः उसकी तरफ देख कर किन्तु इस बार हल्के से मुस्कुराते हुए पूछा__”अगर अच्छा फील कर रही हो तो अच्छी बात है। मुझे तुमसे इस वारदात के बारे में कुछ पूछताॅछ करनी है। लेकिन उससे पहले मैं तुम्हें ये बता दूॅ कि तुम्हें मुझसे भयभीत होने की कोई ज़रूरत नहीं है। मैं भी तुम्हारी तरह एक लड़की ही हूॅ और हाॅ तुम मुझे अपनी दोस्त समझ सकती हो, ठीक है ना?”

लड़की के चेहरे पर कई सारे भाव आए और चले भी गए। उसने रितू की बातों का अपनी पलकों को झपका कर जवाब दिया।

“ओके, तो अब तुम मुझे सबसे पहले अपना नाम बताओ।” रितू ने मुस्कुरा कर कहा।

“वि वि…विधी।” उस लड़की के थरथराते होठों से आवाज़ आई।

उसका नाम सुन कर रितू को झटका सा लगा। मस्तिष्क में जैसे बम्ब सा फटा था। चेहरे पर एक ही पल में कई तरह के भाव आए और फिर लुप्त हो गए। रितू ने सीघ्र ही खुद को नार्मल कर लिया।

“ओह….कितना खूबसूरत सा नाम है तुम्हारा।” रितू ने कहा। उसके दिमाग़ में कुछ और ही ख़याल था, बोली__”विधी…विधी चौहान, राइट?”

लड़की की आॅखों में एक बार पुनः चौंकने के भाव आए थे। एकाएक ही उसका चेहरा सफेद फक्क सा पड़ गया था। चेहरे पर घबराहट के चिन्ह नज़र आए। उसने अपनी गर्दन को दूसरी तरफ मोड़ लिया। 

“तो विधी।” रितू ने कहा__”अब तुम मुझे बेझिझक बताओ कि क्या हुआ था तुम्हारे साथ?”

रितू की बात पर विधी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वह दूसरी तरफ मुह किये लेटी रही। जबकि उसकी ख़ामोशी को देख कर रितू ने कहा__”देखो ये ग़लत बात है विधी। अगर तुम कुछ बताओगी नहीं तो मैं कैसे उस अपराधी को सज़ा दिला पाऊॅगी जिसने तुम्हारी यानी मेरी दोस्त की ऐसी हालत की है? इस लिए बताओ मुझे….सारी बातें विस्तार से बताओ कि क्या और कैसे हुआ था?”

“मु मुझे कुछ नहीं पता।” विधी ने दूसरी तरफ मुह किये हुए ही कहा__”मैं नहीं जानती कि किसने कब कैसे मेरे साथ ये सब किया?”

“तुम झूॅठ बोल रही विधी।” रितू की आवाज़ सहसा तेज़ हो गई__”भला ऐसा कैसे हो सकता है कि तुम्हारे साथ इतना कुछ हुआ और तुम्हें इस सबके बारे में थोड़ा सा भी पता न हुआ हो?”

“भला मैं झूॅठ क्यों बोलूॅगी आपसे?” विधी ने इस बार रितू की तरफ पलट कर कहा था।

“हाॅ लेकिन सच भी तो नहीं बोल रही हो तुम?” रितू ने कहा__”आख़िर वो सब बताने में परेशानी क्या है? देखो अगर तुम नहीं बताओगी तो सच जानने के लिए पुलिस के पास और भी तरीके हैं। कहने का मतलब ये कि, हम ये पता लगा ही लेंगे कि तुम्हारे साथ ये सब किसने किया है?”

बेड पर लेटी विधी के चेहरे पर असमंजस व बेचैनी के भाव उभरे। कदाचित् समझ नहीं पा रही थी कि वह रितू की बातों का क्या और कैसे जवाब दे?

“तुम्हारे चेहरे के भाव बता रहे हैं विधी कि तुम मेरे सवालों से बेचैन हो गई हो।” रितू ने कहा__”तुम जानती हो कि तुम्हारे साथ ये सब किसने किया है। लेकिन बताने में शायद डर रही हो या फिर हिचकिचा रही हो।”

विधी ने कमरे में मौजूद लेडी शिपाही व नर्स की तरफ एक एक दृष्टि डाली फिर वापस रितू की तरफ दयनीय भाव से देखने लगी। रितू को उसका आशय समझते देर न लगी। उसने तुरंत ही लेडी शिपाही व नर्स को बाहर जाने का इशारा किया। नर्स ने बाहर जाते हुए इतना ही कहा कि पेशेन्ट को किसी बात के लिए ज्यादा मजबूर मत कीजिएगा क्योंकि इससे उसके दिलो दिमाग़ पर बुरा असर पड़ सकता है। नर्स तथा लेडी शिपाही के बाहर जाने के बाद रितू ने पलट कर विधी की तरफ देखा।

“देखो विधी, अब इस कमरे में हम दोनो के सिवा दूसरा कोई नहीं है।” रितू ने प्यार भरे लहजे से कहा__”अब तुम मुझे यानी अपनी दोस्त को बता सकती हो कि ये सब तुम्हारे साथ कब और किसने किया है?”

“क..क कल मैं अपने एक दोस्त की बर्थडे पार्टी में गई थी।” विधी ने मानो कहना शुरू किया, उसकी आवाज़ में लड़खड़ाहट थी__”वहाॅ पर हमारे काॅलेज की कुछ और लड़कियाॅ थी जो हमारे ही ग्रुप की फ्रैण्ड्स थी और साथ में कुछ लड़के भी। पार्टी में सब एंज्वाय कर रहे थे। मेरी दोस्त परिधि ने मनोरंजन का सारा एरेन्जमेन्ट किया हुआ था। जिसमें बियर और शराब भी थी। दोस्त के ज़ोर देने पर मैंने थोड़ा बहुत बियर पिया था। लेकिन मुझे याद है कि उस बियर से मैने अपना होश नहीं खोया था। हम सब डान्स कर रहे थे, तभी मेरी एक फ्रैण्ड ने मेरे हाॅथ में काॅच का प्याला पकड़ाया और मस्ती के ही मूड में मुझे पीने का इशारा किया। मैंने भी मुस्कुरा कर उसके दिये हुए प्याले को अपने मुह से लगा लिया और उसे धीरे धीरे करके पीने लगी। किन्तु इस बार इसका टेस्ट पहले वाले से अलग था। फिर भी मैंने उसे पी लिया। कुछ ही देर बाद मेरा सर भारी होने लगा। वहाॅ की हर चीज़ मुझे धुंधली सी दिखने लगी थी। उसके बाद मुझे नहीं पता कि किसने मेरे साथ क्या किया? हाॅ बेहोशी में मुझे असह पीड़ा का एहसास ज़रूर हो रहा था, इसके सिवा कुछ नहीं। जब मुझे होश आया तो मैंने अपने आपको यहाॅ हास्पिटल में पाया। मुझे नहीं पता कि यहाॅ पर मैं कैसे आई? लेकिन इतना जान चुकी हूॅ कि मेरा सबकुछ लुट चुका है, मैं किसी को मुह दिखाने के काबिल नहीं रही।”

इतना सब कहने के साथ ही विधी बेड पर पड़े ही ज़ार ज़ार रोने लगी थी। उसकी आॅखों से आॅसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। इंस्पेक्टर रितू उसकी बात सुनकर पहले तो हैरान रही फिर उसने उसे बड़ी मुश्किल से शान्त कराया।

“तुम्हें यहाॅ पर मैं लेकर आई थी विधी।” रितू ने गंभीरता से कहा__”पुलिस थाने में किसी अंजान ब्यक्ति ने फोन करके हमें सूचित कर बताया कि शहर से बाहर मेन सड़क के नीचे कुछ दूरी पर एक लड़की बहुत ही गंभीर हालत में पड़ी है। वो जगह हल्दीपुर की अंतिम सीमा के पास थी, जहाॅ से हम तुम्हें उठा कर यहाॅ हास्पिटल लाए थे।”

“ये आपने अच्छा नहीं किया।” विधी ने सिसकते हुए कहा__”उस हालत में मुझे वहीं पर मर जाने दिया होता। कम से कम उस सूरत में मुझे किसी के सामने अपना मुह तो न दिखाना पड़ता। मेरे घर वाले, मेरे माता पिता को मुझे देख कर शर्म से अपना चेहरा तो न झुका लेना पड़ता।”

“देखो विधी।” रितू ने समझाने वाले भाव से कहा__”इस सबमें तुम्हारी कोई ग़लती नहीं है और ये बात तुम्हारे पैरेन्ट्स भी जानते और समझते हैं। ग़लती जिनकी है उन्हें इस सबकी शख्त से शख्त सज़ा मिलेगी। तुम्हारे साथ ये अत्याचार करने वालों को मैं कानून की सलाखों के पीछे जल्द ही पहुचाऊॅगी।”

विधी कुछ न बोली। वह बस अपनी आॅखों में नीर भरे देखती रही रितू को। जबकि,,

“अच्छा ये बताओ कि तुम्हारी दोस्त की पार्टी में उस वक्त कौन कौन मौजूद था जिनके बारे में तुम जानती हो?” रितू ने पूछा__”साथ ही ये भी बताओ कि तुम्हें उनमें से किन पर ये शक़ है कि उन्होने तुम्हारे साथ ऐसा किया हो सकता है? तुम बेझिझक होकर मुझे उन सबका नाम पता बताओ।”

विधी कुछ देर सोचती रही फिर उसने पार्टी में मौजूद कुछ लड़के लड़कियों के बारे में रितू को बता दिया। रितू ने एक काग़ज पर उन सबका नाम पता लिख लिया। उसके बाद कुछ और पूछताछ करने के बाद रितू कमरे से बाहर आ गई।

रितू को डाक्टर ने बताया कि वो लड़की दो महीने की प्रैग्नेन्ट है। ये सुन कर रितू बुरी तरह चौंकी थी। हलाॅकि मिस्टर चौहान ने डाक्टर को मना किया था कि ये बात वह किसी को न बताए। किन्तु डाक्टर ने अपना फर्ज़ समझ कर पुलिस के रूप में रितू को बता दिया था।

रितू ने मिस्टर चौहान को एक बार थाने में आने का कह कर हास्पिटल से निकल गई थी। उसके मस्तिष्क में एक ही ख़याल उछल कूद मचा रहा था कि ‘क्या ये वही विधी है जिसे विराज प्यार करता था’???? रितू ने कभी विधी को देखा नहीं था, और नाही उसके बारे में उसके भाई विराज ने कभी बताया था। उसे तो बस कहीं से ये पता चला था कि उसका भाई विराज किसी विधी नाम की लड़की से प्यार करता है। इस लिए आज जब उसने उस लड़की के मुख से उसका नाम विधी सुना तो उसके दिमाग़ में तुरंत ही उस विधी का ख़याल आ गया जिस विधी नाम की लड़की से उसका भाई प्यार करता है। रितु के मन में पहले ये विचार ज़रूर आया कि वह एक बार उससे ये जानने की कोशिश करे कि क्या वह विराज को जानती है? लेकिन फिर उसने तुरंत ही अपने मन में आए इस विचार के तहत उससे इस बारे में पूछने का ख़याल निकाल दिया। उसे लगा ये वक्त अभी इसके लिए सही नहीं है।

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रात में डिनर करने के बाद एक बार फिर से सब ड्राइंग रूम में एकत्रित हुए। अभय किसी सोच में डूबा हुआ था। गौरी ने उसे सोच में डूबा देख कर कहा__”करुणा और बच्चे कैसे हैं अभय?”

“आं..हाॅ सब ठीक हैं भाभी।” अभय ने चौंकते हुए कहा था।

“शगुन कैसा है?” गौरी ने पूछा__”क्या अभी भी वैसी ही शरारतें करता है वह? करुणा तो उसकी शरारतों से परेशान हो जाती होगी न? और…और मेरी बेटी दिव्या कैसी है…उसकी पढ़ाई कैसी चल रही है?”

“सब अच्छे हैं भाभी।” अभय ने नज़रें चुराते हुए कहा__”दिव्या की पढ़ाई भी अच्छी चल रही है।”

“क्या बात है?” गौरी उसे नज़रें चुराते देख चौंकी__”तुम मुझसे क्या छुपा रहे हो अभय? घर में सब ठीक तो हैं ना? मुझे बताओ अभय….मेरा दिल घबराने लगा है।”

“कोई ठीक नहीं है भाभी कोई भी।” अभय के अंदर से मानो गुबार फट पड़ा__”हवेली में कोई भी ठीक नहीं हैं। करुणा और बच्चों को मैं करुणा के मायके भेज कर ही यहाॅ आया हूॅ। इस समय घर के हालात बहुत ख़राब हैं भाभी। किसी पर भरोसा करने लायक नहीं रहा अब।”

“आख़िर हुआ क्या है अभय?” गौरी के चेहरे पर चिन्ता के भाव उभर आए__”साफ साफ बताते क्यों नहीं?”

सामने सोफे पर बैठे विराज और निधि भी परेशान हो उठे थे। दिल किसी अंजानी आशंकाओं से धड़कने लगा था उनका।

“क्या बताऊॅ भाभी?” अभय ने असहज भाव से कहा__”मुझे तो बताने में भी आपसे शरम आती है।”

“क्या मतलब?” गौरी ही नहीं बल्कि अभय की इस बात से विराज और निधि भी बुरी तरह चौंके थे।

“एक दिन की बात है।” फिर अभय कहता चला गया। उसने वो सारी बातें बताई जो शिवा ने किया था। उसने बताया कि कैसे शिवा उसके न रहने पर उसके घर आया था और अपनी चाची को बाथरूम में नहाते देखने की कोशिश कर रहा था। इस सबके बाद कैसे करुणा ने आत्म हत्या करने की कोशिश की थी। अभय ये सब बताए जा रहा था और बाॅकी सब आश्चर्य से मुह फाड़े सुनते जा रहे थे।

“हे भगवान।” गौरी ने रोते हुए कहा__”ये सब क्या हो गया? मेरी फूल सी बहन को भी नहीं बक्शा उस नासपीटे ने।”

“ये तो कुछ भी नहीं है भाभी।” अभय ने भारी स्वर में कहा__”उस हरामज़ादे ने तो आपकी बेटी दिव्या पर भी अपनी गंदी नज़रें डालने में कोई संकोच नहीं किया।”

“क्या?????” गौरी उछल पड़ी।

“हाॅ भाभी।” अभय ने कहा__”ये बात खुद दिव्या ने मुझे बताई थी।”

“जैसे माॅ बाप हैं वैसा ही तो बेटा होगा।” गौरी ने कहा__”माॅ बाप खुद ही अपने बेटे को इस राह पर चलने की शह दे रहे हैं अभय।”

“क्या मतलब?” इस बार बुरी तरह उछलने की बारी अभय की थी, बोला__”ये आप क्या कह रही हैं?”

“यही सच है अभय।” गौरी ने गंभीरता से कहा__”आपके बड़े भाई साहब और भाभी बहुत ही शातिर और घटिया किस्म के हैं। तुम उनके बारे में कुछ नहीं जानते। लेकिन मैं और माॅ बाबू जी उनके बारे में अच्छी तरह जानते हैं। तुम्हें तो वही बताया और दिखाया गया जो उन्होंने गढ़ कर तुम्हें दिखाना था। ताकि तुम उनके खिलाफ न जा सको।”

“उस हादसे के बाद से मुझे भी ऐसा ही कुछ लगने लगा है भाभी।” अभय ने बुझे स्वर में कहा__”उस हादसे ने मेरी आॅखें खोल दी। तथा मुझे इस सबके बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया। इसी लिए तो मैं सारी बातों को जानने के लिए आप सबके पास आया हूॅ। मुझे दुख है कि मैंने सारी बातें पहले ही आप सबसे जानने की कोशिश क्यों नहीं की? अगर ये सब मैने पहले ही पता कर लिया होता तो आप सबको इतनी तक़लीफ़ें नहीं सहनी पड़ती। मैं आप सबके लिए बड़े भइया भाभी से लड़ता और उन्हें उनके इस कृत्य की सज़ा भी देता।”

“तुम उनका कुछ भी न कर पाते अभय।” गौरी ने कहा__”बल्कि अगर तुम उनके रास्ते का काॅटा बनने की कोशिश करते तो वो तुम्हें भी उसी तरह अपने रास्ते से हमेशा हमेशा के लिए हटा देते जैसे उन्होंने राज के पिता को हटा दिया था।”

“क्या???????” अभय बुरी तरह उछला था, बोला__”मॅझले भइया को…..???”

“हाॅ अभय।” गौरी की आॅखें छलक पड़ी__”तुम सब यही समझते हो कि तुम्हारे मॅझले भइया की मौत खेतों में सर्प के काटने से हुई थी। ये सच है लेकिन ये सब सोच समझ कर किया गया था। वरना ये बताओ कि खेत पर बने मकान के कमरे में कोई सर्प कहाॅ से आ जाता और उन्हें डस कर मौत दे देता? सच तो ये है कि कमरे में लेटे तुम्हारे भइया को सर्प से कटाया गया और जब वो मृत्यु को प्राप्त हो गए तो उन्हें कमरे से उठा कर खेतों के बीच उस जगह डाल दिया गया जिस जगह खेत में पानी लगाया जा रहा था। ये सब इस लिए किया गया ताकि सबको यही लगे कि खेतों में पानी लगाते समय ही तुम्हारे भइया को किसी ज़हरीले सर्प ने काटा और वहीं पर उनकी मृत्यु हो गई।”

“हे भगवान।” अभय अपने दोनो हाथों को सिर पर रख कर रो पड़ा__”मेरे देवता जैसे भाई को इन अधर्मियों ने इस तरह मार दिया था। नहीं छोंड़ूॅगा….ज़िंदा नहीं छोड़ूॅगा उन लोगों को मैं।”

“नहीं अभय।” गौरी ने कहा__”उन्हें उनके कुकर्मों की सज़ा ज़रूर मिलेगी।”

“पर ये सब आपको कैसे पता भाभी कि मॅझले भइया को इन लोगों ने ही सर्प से कटवा कर मारा था?” अभय ने पूछा__”और वो सब भी बताइए भाभी जो इन लोगों ने आपके साथ किया है? मैं जानना चाहता हूॅ कि इन लोगों ने मेरे देवी देवता जैसे भइया भाभी पर क्या क्या अनाचार किये हैं? मैं जानना चाहता हूॅ कि शेर की खाल ओढ़े इन भेड़ियों का सच क्या है?”

“मैं जानती हूॅ कि तुम जाने बग़ैर रहोगे नहीं अभय।” गौरी ने गहरी साॅस ली__”और तुम्हें जानना भी चाहिए। आख़िर हक़ है तुम्हारा।”

“तो फिर बताइए भाभी।” अभय ने उत्सुकता से कहा__”मुझे इन लोगों का घिनौना सच सुनना है।”

अभय की बात सुन कर गौरी ने एक गहरी साॅस ली। उसके चेहरे पर अनायास ही ऐसे भाव उभर आए थे जैसे अपने आपको इस परिस्थिति के लिए तैयार कर रही हो।

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प्रतिमा हवेली में ऊपरी हिस्से पर बने उस कमरे में पहुॅची जिस कमरे के बेड पर इस वक्त नैना औंधी पड़ी सिसकियाॅ ले लेकर रोये जा रही थी। प्रतिमा उसे इस तरह रोते देख उसके पास पहुॅची और बेड के एक साइड बैठ कर उसे उसके कंधों से पकड़ अपनी तरफ खींच कर पलटाया। नैना ने पलटने के बाद जैसे ही अपनी भाभी को देखा तो झटके से उठ कर उससे लिपट कर रोने लगी। प्रतिमा ने किसी तरह उसे चुप कराया।

“शान्त हो जाओ नैना।” प्रतिमा ने गंभीरता से कहा__”और मुझे बताओ कि आख़िर ऐसा क्या हुआ है जिसकी वजह से तुमने दामाद जी को तलाक दे दिया है? देखो पति पत्नी के बीच थोड़ी बहुत अनबन तो होती ही रहती है। इस लिए इसमें तलाक दे देना कोई समझदारी नहीं है। बल्कि हर बात को तसल्ली से और समझदारी से सुलझाना चाहिए।”

“भाभी इसमे मेरी कहीं भी कोई ग़लती नहीं है।” नैना ने दुखी भाव से कहा__”मैं तो हमेशा ही आदित्य को दिलो जान से प्यार करती रही थी। सब कुछ ठीक ठाक ही था लेकिन पिछले छः महीने से हमारे बीच संबंध ठीक नहीं थे। इसकी वजह ये थी आदित्य किसी दूसरी लड़की से संबंध रखने लगे थे। जब मुझे इस बात का पता चला और मैंने उनसे इस बारे में बात की तो वो मुझ पर भड़क गए। कहने लगे कि मैं बाॅझ हूॅ इस लिए अब वो मुझसे कोई मतलब नहीं रखना चाहते हैं। मैने उनसे हज़ारो बार कहा कि अगर मैं बाॅझ हूॅ तो मुझे एक बार डाक्टर को दिखा दीजिए। पर वो मेरी सुनने को तैयार ही नहीं थे। तब मैने खुद एक दिन डाक्टर से चेक अप करवाया। बाद में डाक्टर ने कहा कि मैं बिलकुल ठीक हूॅ यानी बाॅझ नहीं हूॅ। मैंने डाक्टर की वो रिपोर्ट लाकर उन्हें दिखाया और कहा कि मैं बाॅझ नहीं हूॅ। बल्कि बच्चे पैदा कर सकती हूॅ। इस लिए एक बार आप भी अपना चेक अप करवा लीजिए। मेरी इस बात से वो गुस्सा हो गए और मुझे गालियाॅ देने लगे। कहने लगे कि तू क्या कहना चाहती है कि मैं ही नामर्द हूॅ? बस भाभी इसके बाद तो पिछले छः महीने से यही झगड़ा चलता रहा हमारे बीच। इस सबका पता जब मेरे सास ससुर को चला तो वो भी अपने बेटे के पक्ष में ही बोलने लगे और मुझे उल्टा सीधा बोलने लगे। अब आप ही बताइए भाभी मैं क्या करती? ऐसे पति और ससुराल वालों के पास मैं कैसे रह सकती थी? इस लिए जब मुझमें ज़ुल्म सहने की सहन शक्ति न रही तो तंग आकर एक दिन मैने उन्हें तलाक दे दिया।”

नैना की सारी बातें सुनने के बाद प्रतिमा भौचक्की सी उसे देखती रह गई। काफी देर तक कोई कुछ न बोला।

“ये तो सच में बहुत ही गंभीर बात हो गई नैना।” फिर प्रतिमा ने गहरी साॅस लेकर कहा__”तो क्या आदित्य ने तलाक के पेपर्स पर अपने साइन कर दिये?”

“पहले तो नहीं कर रहा था।” नैना ने अधीरता से कहा__”फिर जब मैंने ये कहा कि मेरे भइया भाभी खुद भी एक वकील हैं और वो जब आपको कोर्ट में घसीट कर ले जाएॅगे तब पता चलेगा उन्हें। कोर्ट में सबके सामने मैं चीख चीख कर बताऊॅगी कि आदित्य सिंह नामर्द है और बच्चा पैदा नहीं कर सकता तब तुम्हारी इज्जत दो कौड़ी की भी नहीं रह जाएगी। बस मेरे इस तरह धमकाने से उसने फिर तलाक के पेपर्स पर अपने साइन किये थे।”

“लेकिन मुझे ये समझ में नहीं आ रहा कि तुम्हें इस बात का पता पहले क्यों नहीं चला कि आदित्य नामर्द है?” प्रतिमा ने उलझन में कहा__”बल्कि ये सब अब क्यों हुआ? क्या आदित्य का पेनिस बहुत छोटा है या फिर उसके पेनिस में इरेक्शन नहीं होता? आख़िर प्राब्लेम क्या है उसमें?”

“और सबकुछ ठीक है भाभी।” नैना ने सिर झुकाते हुए कहा__”लेकिन मुझे लगता है कि उसके स्पर्म में कमी है। जिसकी वजह से बच्चा नहीं हो पा रहा है। मैंने बहुत कहा कि एक बार वो डाक्टर से चेक अप करवा लें लेकिन वो इस बात को मानने के लिए तैयार ही नहीं हैं।”

“ओह, चलो कोई बात नहीं।” प्रतिमा ने उसके चेहरे को सहलाते हुए कहा__”अब तुम फ्रेश हो जाओ तब तक मैं तुम्हारे लिए गरमा गरम खाना तैयार कर देती हूॅ।”

नैना ने सिर को हिला कर हामी भरी। जबकि प्रतिमा उठ कर कमरे से बाहर निकल गई। बाहर आते ही वह चौंकी क्योंकि अजय सिंह दरवाजे की बाहरी साइड दीवार से चिपका हुआ खड़ा था। प्रतिमा को देख कर वह अजीब ढंग से मुस्कुराया और फिर प्रतिमा के साथ ही नीचे चला गया।

अपडेट हाज़िर है दोस्तो,,,,,,

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