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अपडेट………..《 17 》

अब तक……

“देख रही हूॅ कि आपके चेहरे पर उभरते हुए अनगिनत भाव किस बात की गवाही दे रहे हैं?” रितू ने अजीब से भाव से कहा।

“क क्या मतलब??” अजय सिंह बुरी तरह चौंका था।

“जाने दीजिए।” रितू ने कहा__”देखिए फारेंसिक डिपार्टमेंट वाले भी आ गए। आइए फैक्टरी के अंदर चलते हैं।”

अजय सिंह एकाएक अंदर ही अंदर बुरी तरह घबरा सा गया। उसे तो लगने लगा था कि बातें अब तक उसके पक्ष में ही हैं और इतनी पूछताॅछ के बाद कार्यवाही बंद कर दी जाएगी। लेकिन उसे अब महसूस हुआ कि ये सब तो महज एक औपचारिक पूछताॅछ थी असली छानबीन तो अब शुरू होगी। 

फाॅरेंसिक डिपार्टमेंट की टीम आ चुकी थी तथा खोजी दस्ता भी। गाड़ियों से निकल कर सब बाहर आ गए। अजय सिंह उस वक्त और बुरी तरह चौंका जब गाड़ियों के अंदर से कुछ कुत्ते बाहर निकले। अजय सिंह को समझते देर न लगी कि ये कुत्ते इस सबकी छानबीन मे उन सबकी सहायता के लिए ही हैं।

पल भर में ही अजय सिंह की हालत ख़राब हो गई। इस सबके बारे में उसने ख्वाब तक में न सोचा था। आज पहली बार उसे लगा कि अपनी बेटी रितू को पैदा करके उसने बहुत बड़ी भूल की थी।

अब आगे……

इंस्पेक्टर रितू के निर्देशानुसार पुलिस और बाॅकी विभाग की टीम्स फैक्टरी की तरफ बढ़ चली, और साथ ही बढ़ चली थी अजय सिंह की हृदय गति। हलाॅकि उसके साथ आए बाॅकी सब नार्मल थे। प्रतिमा और अभय के चेहरे पर गंभीरता के भाव ज़रूर थे किन्तु ये दोनो अजय सिंह की तरह अपनी हालत से लाचार या परेशान नहीं थे।

छानबीन करने आई बाॅकी सब टीमों के पीछे पीछे अजय, प्रतिमा व अभय भी चल रहे थे किन्तु अजय सिंह के कदम बड़ी मुश्किल से उठ रहे थे। 

“सब ठीक हो जाएगा अजय।” सहसा प्रतिमा ने अजय की हालत देख उसे दिलाशा देने की गरज से कहा__”अब तो हमारी बेटी ने खुद ही इस केस को अपने हाॅथ में ले लिया है। मुझे पूरा यकीन है कि वो सब कुछ पता कर लेगी। हमारी फैक्टरी में आग लगाने के पीछे तथा हमें बरबाद करने के पीछे जिस किसी का भी हाॅथ होगा वह उसे ज़रूर पकड़ लेगी। तुम बस खुद को सम्हालो और अपनी ऐसी शकल न बनाए रखो।”

“भाभी बिलकुल ठीक कह रही हैं बड़े भइया।” अभय ने कहा__”आपको अब इस तरह परेशान होने की कोई ज़रूरत नहीं है। यकीनन रितू बेटी के चलते सब कुछ ठीक हो जाएगा। मुझे अपनी भतीजी पर गर्व है कि उसने पुलिस फोर्स ज्वाइन किया और ज्वाइन करते ही उसे अपनी ही फैक्टरी में लगी आग का ये केस मिल गया। मुझे उसकी काबिलियत पर पूरा भरोसा है। आप बेफिक्र हो जाइए भइया…इवरीथिंग विल वी आलराइट।”

अजय सिंह इन दोनो को भला क्या कहता??? वह भला क्या कहता कि वह किस बात से परेशान है? वह भला क्या कहता कि जिस भतीजी पर वह गर्व कर रहा है उसकी उसी भतीजी की वजह से आज वह पल पल इस हालत से मरा जा रहा है। हालात ने कितना बेबस व लाचार बना दिया था उसे कि सक्षम होने के बावजूद भी वह कुछ नहीं कर सकता था। हिन्दू धर्म के जितने भी देवी देवताओं का उसे पता था उसने उन सबको मन ही मन याद करके उनसे ये फरियाद कर डाली थी कि ये केस तथा ये छानबीन बस यहीं पर रुक जाए मगर ऐसा होता उसे अब तक नज़र नहीं आया था। इतना बेबस तथा इतना परेशान आज से पहले वह अपनी ज़िन्दगी में कभी न हुआ था। उसने तो ये तक सोच लिया था कि अगर ये छानबीन रुक जाए तथा ये केस बंद हो जाए तो वह अब से इस गैर कानूनी काम को करने से हमेशा के लिए तौबा कर लेगा। मगर ये भी सच है न दोस्तो कि जब हम किसी चीज़ के बीज बो चुके होते हैं तो फिर बाद में हमें उस बीज के द्वारा उत्पन्न हुई फसल को काटना भी पड़ता है या उस बीज से उग आए फल को खाना भी पड़ता है। यही नियति बन गई थी अजय सिंह की, मगर अब वह अपने ही द्वारा बोये हुए बीज से उत्पन्न हुए फल को खाना नहीं चाहता था।

उधर फैक्टरी के इंट्री गेट पर लगे ताले को पुलिस के एक हवलदार ने अपनी जेब से चाभी निकाल कर खोला। ताला खोलने के बाद भारी भरकम लोहे के गेट को दो आदमी की मदद से खोला गया। गेट के खुलते ही सब अंदर की तरफ बढ़ गए। पुलिस के साथ आए खोजी कुत्ते भी एक पुलिस वाले के हाथ में थमी जंजीर के सहारे फैक्टरी के अंदर चले गए। ये लिखने की आवश्यकता नहीं कि इन सबके पीछे अजय, प्रतिमा व अभय भी अंदर चले गए।

ये एक बहुत बड़ा फार्म हाउस हुआ करता था पहले। अजय सिंह ने जब इस बिजनेस की शुरुआत की थी तो किसी दूसरे सेठ की वर्षों से बंद कपड़ा फैक्टरी को सस्ते दामों में खरीदा था। (ये सब बातें कहानी के पहले या दूसरे अपडेट में बताई जा चुकी हैं) उस समय ये कपड़ा फैक्टरी शहर के बीच ही बनी हुई थी। कुछ सालों बाद जब अजय सिंह की इस बिजनेस से अच्छे खासे मुनाफे के रूप में तरक्की हुई तो उसने इस फैक्टरी को नये सिरे से तथा नई मशीनों के साथ शुरू करने का विचार किया। अजय सिंह क्योंकि बहुत ही लालची व महत्वाकांक्षी आदमी था, और बढ़ती आय के साथ उसकी बुरी आदतों में भी इज़ाफा हुआ इस लिए पैसे के लिए वह उन रास्तों को भी अपना लिया जिसे गैर कानूनी कहा जाता है। इस रास्ते में उसके कई अपने गैर कानूनी लोग भी थे। किन्तु गैर कानूनी काम में रिश्क बहुत था तथा शहर के बीच उस छोटी सी फैक्टरी में इस काम को अंजाम देने में आसानी नहीं होती थी। कभी भी लोगों के बीच खुद की असलियत सामने आ जाने का खतरा बना रहता था। इस लिए उसने बहुत सोच समझ कर शहर से बाहर एक बहुत बड़ी ज़मीन ख़रीदी तथा वहाॅ पर इसने नये तरीके से फैक्टरी का निर्माण किया। फैक्टरी काफी बड़ी थी तथा उसके नीचे एक बड़ा बेसमेंट भी बनवाया गया था जो सिर्फ गैर कानूनी चीज़ों के उपयोग में ही आता था। यहाॅ पर उसे किसी चीज़ का खतरा नहीं था। फैक्टरी में मजदूरों को हप्ते में एक दिन अवकाश देने के पीछे भी उसका एक मकसद था। वो मकसद ये था कि अवकाश वाले दिन ही वह स्वतंत्र रूप से अपने गैर कानूनी धंधे को चलाता था। जिसके बारे में कभी किसी को भनक तक न लगी थी। फैक्टरी को बहुत सोच समझ कर ही बनवाया गया था। फैक्टरी के अंदर सिर्फ मशीनें थी जहाॅ पर मजदूर काम करते थे, जबकि फैक्टरी के आला अफसर या बाॅकी स्टाफ फैक्टरी से दूर कुछ फाॅसले पर बने एक बड़े से आफिस में होते थे।

अजय सिंह ने कदाचित ख़्वाब में भी न सोचा था कि कभी ऐसा भी समय उसके जीवन में आ जाएगा जब उसकी इस विसाल फैक्टरी में आग लग जाएगी और इस सबकी छानबीन खुद उसकी ही बेटी पुलिस इंस्पेक्टर बन कर करेगी। कानून का डर उसे कभी नहीं था क्योंकि उसने कानून के नुमाइंदों को अपने वश में कर लिया था। हर महीने वह अच्छी खासी रकम पुलिस के आला अफसरों तक पहुॅचवा देता था। उसके मंत्री तक से अच्छे संबंध थे इस लिए उसे इस धंधे में किसी का कोई डर नहीं था। मगर होनी को कौन टाल सकता था भला? होनी तो अटल होती है, बिना बताए तथा बिना किसी सूचना के वो अपना काम कर डालती है। यही अजय सिंह के साथ हुआ था।

ख़ैर ये सब तो बीती बातें हैं दोस्तो, आइए हम सब वर्तमान की तरफ चलते हैं और देखते हैं कि आगे क्या हो रहा है?

फैक्टरी के अंदर का नज़ारा ही कुछ अलग था। जैसा कि आप सब जानते हैं कि फैक्टरी में भीषण आग लगी हुई थी जिसमें सब कुछ जल कर खाक़ में मिल चुका था। अंदर हर चीज़ कोयला बन चुकी थी। हर जगह पानी में सनी हुई राख तथा टूटे हुए बहुत से टुकड़े पड़े थे। कुछ पल के लिए तो रितू को भी समझ न आया कि इस राख में वह क्या तलाश करे? किन्तु कुछ तो करना ही था, केस रिओपेन हुआ था। इस लिए बिना किसी नतीजे के वह बंद नहीं हो सकता था। ऊपर से आदेश था कि छानबीन अच्छे से होनी चाहिए।

पुलिस के खोजी कुत्ते तथा फाॅरेंसिक डिपार्टमेंट के लोग अपने अपने काम में लग गए। खुद रितू भी वहाॅ की हर चीज़ को बारीकी से देख देख कर जाॅच करने लगी। जबकि इधर अजय, प्रतिमा व अभय चुपचाप उन सबकी कार्यप्रणाली को देखते रहे।

बड़ी बड़ी मशीनों पर जले हुए कपड़ों की राख तथा टुकड़े लिपटे हुए थे। कहीं कहीं पर पिघले हुए शीशे एवं प्लास्टिक नज़र आ रहे थे। अजय सिंह ये सब होने के बाद पहली बार ये सब ध्यान से देख रहा था तथा साथ ही अंदर ही अंदर दुखी भी हो रहा था। कुछ भी हो आखिर उसकी मेहनत का पैसा था वह, फिर चाहे गैर कानूनी वाला हो या फिर सच्चाई वाला।

“मैडम, यहाॅ पर कुछ है।” सहसा एक हवलदार रितू को दूर से ही चिल्लाते हुए कहा।

रितु के साथ साथ सबके कान खड़े हो गए। अजय सिंह की बढ़ी हुई धड़कन मानों उसे रुकती हुई प्रतीत हुई। चेहरे पर तुरंत ही ढेर सारा पसीना उभर आया, तथा चेहरा भय व घबराहट की वजह से पीला पड़ता चला गया। उसने जल्दी से खुद को सम्हाला। अपने दाहिने हाॅथ में लिए रुमाल से उसने तुरंत ही अपने चेहरे का पसीना पोंछा और सरसरी तौर पर इधर उधर देखा। प्रतिमा उसे देख कर तुरंत ही उसके करीब गई तथा हौले से पूछा__”क्या बात है अजय, तुम इतना परेशान और घबराए हुए क्यों लग रहे हो?”

“म मैं क कहाॅ परेशान हूॅ?” अजय सिंह हकलाते हुए बोला__”मैं ठीक हूॅ? ऐसा क्यों लगता है तुम्हें कि मैं परेशान व घबराया हुआ हूॅ?”

प्रतिमा ने उसे बड़े ग़ौर से देखा, फिर कहा__”मुझे ऐसा क्यों लगता है अजय कि जैसे तुम मुझसे कुछ छुपा रहे हो? या फिर ऐसा कि तुम किसी बात से इस लिए घबरा रहे हो कि किसी को वो बात पता न चल जाए।”

अजय सिंह हड़बड़ा गया, आॅखें फाड़े प्रतिमा को देखने लगा। मन में विचार उभरा ‘बेटी क्या कम थी जो अब उसकी माॅ भी मेरी जान लेने पर उतारू हो गई है’।

“ऐसे क्यों देख रहे हो मुझे?” प्रतिमा ने कहा__”क्या मैंने कुछ ग़लत कह दिया है?”

“देखो प्रतिमा।” अजय सिंह ने खुद को सम्हाल कर कहा__”मैं इस वक्त किसी से कुछ नहीं कहना चाहता, इस लिए बेहतर होगा कि तुम भी मुझसे कोई सवाल जवाब न करो।”

“मैं तुम्हारी पत्नी हूॅ अजय।” प्रतिमा ने एकाएक अधीरता से कहा__”तुम्हें इस तरह परेशानी की हालत में नहीं देख सकती। तुम जानते हो कि हर काम में मैं तुम्हारे साथ हूॅ, फिर चाहे वो काम कैसा भी क्यों न हो। तुम्हारी खुशी के लिए हर वो काम कर जाती हूॅ जिसे करने का तुम मुझसे कहते हो। मैं ये भी जानती हूॅ कि तुम मुझसे कोई भी बात नहीं छुपाते फिर ऐसी क्या बात हो गई है जिसे तुम मुझसे छुपा कर खुद अंदर ही अंदर घुटे जा रहे हो?”

“ऐसी कोई बात नहीं है।” अजय सिंह ये सोच कर घबराया जा रहा था कि कहीं कोई ये सब बातें सुन न ले, इस लिए वह बोला__”अब चुप हो जाओ प्लीज।”

“अगर ऐसी कोई बात नहीं है तो यही बात तुम मेरे सिर पर हाॅथ रख कर कहो।” प्रतिमा ने कहने साथ ही अजय सिंह का एक हाॅथ पकड़ कर अपने सिर पर रख लिया।

“ये क्या पागलपन है यार?” अजय सिंह ने तुरंत ही प्रतिमा के सिर से अपना हाॅथ एक झटके में खींच कर थोड़ी ऊॅची आवाज़ में कहा था। उसकी आवाज़ सुन कर अभय का ध्यान उनकी तरफ गया तो वह सीघ्र ही उनके पास आकर ब्याकुलता से बोला__”क्या हुआ भइया? कुछ परेशानी है क्या?”

“न नहीं छोटे।” अजय सिंह मन ही मन झुंझला उठा था किन्तु प्रत्यक्ष मे उसने यही कहा__”ऐसी कोई बात नहीं है।”

अभय ने उसके चेहरे की तरफ कुछ पल देखा फिर वह वापस अपनी जगह पर आकर खड़ा हो गया। जबकि अभय के जाते ही अजय सिंह ने प्रतिमा की तरफ देख कर कहा__”फार गाड शेक..अब कुछ मत बोलना।”

“ये तुम बिलकुल भी अच्छा नहीं कर रहे हो अजय।” प्रतिमा ने कहा__”अगर कोई बात है तो तुम्हें मुझसे बेझिझक बता देना चाहिए, हो सकता है कि मैं तुम्हारी कोई मदद कर सकूॅ।”

“अगर कोई बात है भी तो।” अजय सिंह ने गहरी साॅस ली__”तो इस वक्त नहीं बता सकता, बट बिलीव मी तुम्हें सब कुछ ज़रूर बताऊॅगा। अब जाओ यहाॅ से और मुझे अकेला मेरे हाल पर छोंड़ दो।”

प्रतिमा ने कुछ देर अजय की आंखों में देखा और फिर पलट कर अभय के पास आ गई। उसके मन में हज़ारों विचार किसी बिच्छू की तरह डंक मार मार कर उछल कूद कर रहे थे।

उधर हवलदार के चिल्लाने पर रितू तेज़ी से उसके करीब पहुॅची। रितू के आते ही हवलदार ने सामने की तरफ इशारा किया। रितू ने हवलदार की बताई हुई जगह को देखा तो चौंक गई। दरअसल पिघले हुए प्लास्टिक के नीचे कोई चीज़ थी लाल रंग की। रितू फर्स पर बैठ कर उसे ध्यान से देखने लगी। अपने हाॅथों में ग्लव्स पहन कर उसने उस लाल रंग की चीज़ को उठा लिया। अभी वह उसे ध्यान से देख ही रही थी कि फाॅरेंसिक टीम का एक ब्यक्ति उसके नज़दीक आकर बोला__”मैडम, यहाॅ पर एक बेसमेंट भी है।”

“क्या??” रितू चौंकी।

“यस मैडम।” उस ब्यक्ति ने कहा__”खोजी कुत्ते के द्वारा पता चला है।”

” चलो दिखाओ।” रितू तुरंत ही उठकर चल दी। कुछ देर में ही वो ब्यक्ति रितू को लेकर उस जगह पहुॅचा। रितू ने देखा सचमुच वो तहखाना ही था। किन्तु वह ये देख कर चौंकी कि वह अस्त ब्यस्त हुआ लग रहा था जैसे किसी चीज़ से उसे उड़ाया गया हो। उसे तुरंत ही अपने हाॅथ में ली हुई चीज़ का खयाल आया। उसने अपने हाॅथ में ली हुई चीज़ को उस ब्यक्ति को दिखाकर पूछा__”इस चीज़ को देखो और बताओ ये क्या है?”

“अजयययययय।” अचानक ही एक ज़ोरदार चीख फिज़ा को चीरती हुई सबके कानों से टकराई।

चीख बाहर से आई थी, रितू के साथ साथ सबने सुना किन्तु रितू बाहर की तरफ ये कह कर दौड़ पड़ी कि__”माॅम।”

यकीनन ये चीख प्रतिमा की ही थी। रितू ने बाहर आकर देखा उसकी माॅ और अभय चाचा उसके डैड के पास अजीब हालत में बैठे थे। अजय सिंह जमीन में पड़ा था। अभय ने तुरंत ही उसे अपनी गोंद मे लिटा लिया था।

“माॅम।” रितू करीब पहुॅचते ही बोली__”ये क्या हुआ? डैड इस तरह जमीन में कैसे?”

“पता नहीं बेटा अचानक ही खड़े खड़े धड़ाम से गिर गए।” प्रतिमा ने रोते हुए कहा__”शायद फैक्टरी की ये हालत देख इन्हें गहरा सदमा लगा है जिसके चलते ये चक्कर खाकर गिर गए हैं।”

अजय सिंह पानी से सनी राख पर गिरा था। जमीन में हर तरफ छोटे बड़े पत्थर भी पड़े थे जो अजय सिंह के सिर पर लगे थे और उसके सिर से खून बहने लगा था।

“इन्हें हास्पिटल लेकर जाना पड़ेगा रितू बेटा।” अभय ने कहने के साथ ही अजय सिंह को दोनो हाथों से पकड़ कर उठा लिया और तेज़ कदमों के साथ लोहें वाले गेट से बाहर निकल गया।

“मैं भी उनके साथ हास्पिटल जा रही हूं बेटी।” प्रतिमा ने कहा__”तुझे अपनी ड्यूटी करना है तो कर या तू भी अपने डैड के साथ चल।”

“साॅरी माॅम।” रितू की आॅख में आॅसू आ गए__”इस वक्त मैं आनड्यूटी पर हूॅ और केस के सिलसिले में यहाॅ अपनी टीम्स के साथ हूॅ इस लिए मैं डैड के साथ नहीं जा सकती। लेकिन डैड से कहना कि मुझे उनकी इस हालत से बहुत तकलीफ हो रही है।”

“अच्छी बात है।” प्रतिमा ने कहा और बाहर की तरफ दौड पड़ी। जबकि अपने आॅसू पोंछते हुए रितू पलटी और फैक्टरी के अंदर की तरफ बढ़ गई।

“मैडम ये तो किसी टाइम बम्ब के टुकड़े जैसा लगता है।” रितू के आते ही फारेंसिक टीम के उस आदमी ने कहा।

“क्या???” रितू उछल पड़ी__”ये क्या कह रहे हैं आप??”

“जी पक्के तौर पर तो नहीं कह सकता मगर ज्यादातर संभावना यही है।” उस आदमी ने कहा__”और अगर इस संभावना को सच मान लिया जाय तो ऐसा भी लगता है कि किसी टाइम बम्ब द्वारा ही इस बेसमेंट को उड़ाया गया है। बेसमेंट की हालत इस बात का सबूत है मैडम।”

रितू को उस आदमी की बात में सच्चाई के ढेर सारे अंश महसूस हुए। क्योकि बेसमेंट की हालत सचमुच ऐसी थी जैसे उसे बम्ब के द्वारा उड़ाया गया हो।

“अगर ऐसा है तो।” रितू ने कहा__”ये साबित हो गया कि फैक्टरी में लगी आग महज सार्ट शर्टिक से नहीं बल्कि किसी के द्वारा बम्ब से लगाई गई।”

“बिलकुल।” उस आदमी ने कहा।

“मतलब साफ है कि किसी ने टाइम बम्ब को तहखाने में फिट किया।” रितू कह रही थी__”और वो बम्ब अपने निर्धारित समय पर फट गया। बम्ब के फटते ही बेसमेंट उड़ गया और इसके साथ ही उसके अंदर से तेज़ी से आग का झोंका बाहर आकर यहाॅ चारो तरफ फैले कपड़ों और मशीनों से टकराया। कपड़ों पर लगी आग ने तेज़ी से अपना काम किया और देखते देखते सारी फैक्टरी में आग ने अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया।”

“निःसंदेह।” आदमी ने कहा__”और क्योंकि फैक्टरी बाहर से अवकाश के चलते बंद थी इस लिए जब तक किसी को पता चलता तब तक आग ने उग्र रूप धारण कर सबकुछ बरबाद कर दिया।”

“बेसमेंट के अंदर की क्या पोजीशन है?” रितू ने कहा__”अगर अंदर जाने लायक है तो चलकर जाॅच शुरू करते हैं। देखते हैं और क्या पता चलता है?”

कहने के साथ ही रितू और वो आदमी बेसमेंट के अंदर की तरफ देखने लगे। बेसमेंट के अंदर पुलिस और फाॅरेंसिक के कुछ लोग थे। रितू भी उनके बीच पहुॅच गई।

उधर अजय सिंह को आनन फानन में अभय ने कार में पिछली सीट पर प्रतिमा की गोंद में लिटाया और खुद ड्राइविंग सीट पर बैठकर कार स्टार्ट की। लगभग बीस मिनट बाद वो सब हास्पिटल में थे।

अजय सिंह को तुरंत ही एक रूम में ले जाया गया और डाक्टर ने उसका चेकअप शुरू कर दिया।

अपडेट हाज़िर है दोस्तो…..

मुआफ़ करना, एक बार फिर से कुछ सोच कर अपडेट को यहीं पर विराम दे दिया है मैंने।

आप सबके सामने कुछ सवाल भी तो छोंड़ना है यारो…

क्या हुआ था अजय सिंह को???

अजय सिंह सच में सदमें की वजह से चक्कर खाकर गिरा था या इसमें भी उसकी कोई चाल थी???

इंस्पेक्टर रितू को बेसमेंट में क्या क्या मिला होगा??? 

क्या रितू के सामने उसके बाप का गैर कानूनी काला सच आ पाया या नहीं?????

इस केस में क्या नतीजा निकलेगा????

क्या फैक्टरी में आग लगने की सच्चाई सामने आई और अगर आई तो क्या ये पता चला कि किसने ये सब किया????

अजय सिंह अब क्या करेगा????

आप लोगों से शिकायत है कि आप लोग अपनी राय या अपनी बात खुल कर तथा दिल से नहीं देते हैं। जबकि हर अपडेट में मैं बस यही उम्मीद करके बैठा होता हूॅ। ख़ैर जाने दीजिए, हाॅ नहीं तो….!!

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