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अपडेट………… 《 12 》

अब तक,,,,,,

“ठीक है।” प्रतिमा ने मन ही मन हज़ारों गालियाॅ दी उसे किन्तु प्रत्यक्ष में कहा__”तुम्हें तो मेरा यानी अपनी बड़ी बहन का प्यार भी कुछ और लगता है।”

“ऐसा नहीं है दीदी।” आप तो बेवजह ही नाराज़ हो रहीं हैं।”

“रहने दो।” प्रतिमा ने छोटे बच्चे की तरह तुनक कर कहा__”सब जानती हूॅ मैं।”

तब तक चाय बन चुकी थी। करुणा ने चाय को दो कप में डाला तथा एक कप करुणा को थमाया और एक कप खुद लेकर उसे धीरे धीरे पीने लगी। जबकि प्रतिमा के मन में यही चल रहा था कि ‘आज फिर एक बार मेरी कोशिश बेकार रही।’

अब आगे,,,,,,,,

उधर मुम्बई में इस वक्त ड्राइंग रूम में रखे सोफों पर क्रमशः जगदीश ओबराय, विराज, गौरी तथा निधी आदि बैठे हुए थे।

“इस सब की क्या ज़रूरत है अंकल?” विराज ने कहा__”आप जानते हैं कि जीवन में मेरा सिर्फ एक ही मकसद है और वो है अजय सिंह का खात्मा। मैं अपने इस मकसद को पूरा करने के लिए अब किसी भी प्रकार का ब्यवधान नहीं चाहता।”

“जगदीश भैया ठीक ही कह रहे हैं बेटे।” गौरी ने समझाने वाले लहजे से कहा__”उच्च शिक्षा का होना भी ज़रूरी है। इस लिए तुम अपनी पढ़ाई को भी पूरा करो। हम में से कोई तुम्हें ये नहीं कह रहा कि तुम अपने मकसद से पीछे हटो, बल्कि वो तो तुम्हारा अब प्रण बन गया है उसे तुम ज़रूर पूरा करो। लेकिन साथ साथ अपनी पढ़ाई भी करते रहोगे तो कुछ ग़लत नहीं हो जाएगा।”

“हाॅ भइया।” निधि ने विराज के दाहिने बाजू को मजबूती से पकड़ते हुए कहा__”माॅ और अंकल सही कह रहें हैं आपको अपनी पढ़ाई कान्टीन्यू रखनी चाहिए। और फिर हम दोनों साथ में ही काॅलेज जाया करेंगे। कालेज में अगर मुझे कोई छेड़े तो आप उसकी जम कर धुनाई भी किया करना बिलकुल फिल्म के हीरो की तरह, हाॅ नहीं तो।”

“गुड़िया ने भी कह दिया तो ठीक है अंकल मैं अपनी पढ़ाई जारी करता हूॅ।” विराज ने निधि के सिर पर प्यार से हाॅथ फेर कर कहा__”मैं कल ही किसी मेडिकल काॅलेज में एडमीशन करवा लेता हूॅ।”

“उसकी ज़रूरत नहीं है बेटे।” जगदीश ने हॅस कर कहा__”मैंने आलरेडी तुम्हारा एडमीशन एक बढ़िया से मेडिकल काॅलेज में करवा दिया है।”

“क् क्या???” विराज ने चौंकते हुए कहा।

“हाॅ बेटे।” जगदीश ने हॅस कर कहा__”मुझे पता था कि तुम्हें इसके लिए मानना ही पड़ेगा, इस लिए मैंने पहले ही तुम्हारा एडमीशन करवा दिया है। कल कालेज जा कर सबसे पहले प्रिंसिपल से मिल लेना। दरअसल एडमीशन तो मैंने करवा दिया है किन्तु फार्म वगैरा में साइन तो तुम्हारे ही लगेंगे न। इस लिए जा कर पहले ये सब क्लियर कर लेना। बाॅकी किसी चीज़ की फिक्र मत करना। यूॅ समझना कि अपना ही काॅलेज है।”

“शुक्रिया अंकल।” विराज एकाएक सहसा गंभीर हो गया__”आपने इतना कुछ हमारे लिए कर दिया है जिसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता। आप हमारे जीवन में भगवान बन कर आए हैं वर्ना हर चीज़ से बेबस व लाचार हम आखिर क्या कर पाते?? ये मेरे ऊपर आपका कर्ज़ है जिसे मैं किसी भी जनम में उतार नहीं सकता।”

“ये सब कह कर तुमने मुझे पराया कर दिया बेटे।” जगदीश भावुक होकर बोला था__”जबकि मैं तुम सबको अपना परिवार ही मानने लगा हूॅ।”

“नहीं अंकल।” विराज सोफे से उठ कर तुरंत ही जगदीश के पैर पकड़ लिया, बोला__”मेरे कहने का मतलब वो नहीं था। आप पराए कैसे हो जाएंगे भला? आप हमारे लिए पराए हो भी नहीं सकते हैं। आप तो अपने व पराए से परे हैं अंकल। आप इस कलियुग के अद्वतीय इंसान हैं जिनके अंदर सिर्फ और सिर्फ नेकदिली और सच्चाई है।”

“ये सच है भैया।” गौरी की आॅखों में आॅसू थे, बोली__”आप हमारे लिए अपनों से भी बढ़ कर हैं, अपने कैसे होते हैं ये भी हमने देखा है मगर आप ग़ैर होकर भी अपने से बढ़ कर हैं। राज तो नासमझ है आप उसकी बात पर ये बिलकुल न समझें कि हम आपको पराया समझते हैं। बल्कि अगर दिल की सच्चाई बताऊॅ तो वो ये है कि अब आपके लिए अपनी जान तक कुर्बान करने का मन करने लगा है। हमारे ह्रदय में आपका स्थान बहुत ऊॅचा है भैया…बहुत ऊॅचा।”

“तुमने ये सब कह कर मुझे वो खुशी दी है बहन जो संसार भर की दौलत मिल जाने पर भी न होती।” जगदीश ने अपनी आॅखों में छलक आए आॅसुओं को पोंछते हुए कहा__”इसके पहले ऐसा लगता था जैसे ये संसार महज एक कब्रिस्तान है जहाॅ कोई इंसान तो क्या परिंदा तक नहीं है। कदाचित् सब कुछ खोकर और अकेलेपन में ऐसा ही महसूस होता है। मगर तुम सबके आ जाने से ये वीरान सा जीवन जैसे फिर से हरा भरा और खुशहाल हो गया है।”

“मैं तो आपको अपने भाई के रूप में पाकर धन्य ही हो गई हूॅ भैया।” गौरी ने कहा__”मेरा अपना कोई भाई न था, एक भाई के लिए तथा उसकी कमी से हमेशा दिल में दर्द रहा था। आपके मिलने से अब मन को त्रप्ति मिल गई है।”

“ये सब ईश्वर की ही कृपा है बहन।” जगदीश ने कहा__”वो जो भी करता है बहुत कुछ सोच कर ही करता है। इसके पहले कौन किसे जानता था किन्तु आज ऐसा है जैसे हम सब कभी गैर थे ही नहीं। सच कहता हूॅ बहन ईश्वर की इस इनायत से बहुत खुश हूॅ मैं।”

“अच्छा अब बहुत हो गया ये इमोशनल ड्रामा।” निधि ने भोलेपन से कहा__”कुछ खाने पीने की बात कीजिए न। मेरे पेट में पता नहीं कितने चूहे हैं जो काफी देर से उछल कूद कर रहे हैं। आप में से किसी को इसका खयाल ही नहीं है….जाओ नहीं बात करना किसी से अब, हाॅ नहीं तो।”

“चूहे तो मेरे पेट में भी कूद रहे हैं गुड़िया।” विराज ने अजीब सा मुह बना कर कहा__”मुझे भी किसी से बात नहीं करना अब, हाॅ नहीं तो।”

“क्या??????” निधि उछल पड़ी__”आपने मेरी नकल की? मतलब आपने मुझे चिढ़ाया? जाओ आपसे तो बिलकुल बात नहीं करनी, हाॅ नही तो।”

“ठीक है फिर।” विराज ने सोफे पर से उठते हुए कहा__”मैं अकेले ही चला जाता हूॅ आइसक्रीम खाने।”

“नननहीहीं।” निधि चीखी और उछल कर फौरन ही खड़ी हो गई__”आप अकेले आइसक्रीम खाने नहीं जा सकते मैं भी चलूॅगी आपके साथ और अगर आप अपने साथ मुझे न ले गए तो सोच लीजिएगा, हाॅ नहीं तो।”

“जो मुझसे बात नहीं करता मैं उसे अपने साथ कहीं नहीं लेकर जाता।” विराज ने अकड़ते हुए कहा__”तुम मुझसे बात नहीं कर रही तो तुम्हें अपने साथ लेकर क्यों जाऊॅ??”

“अरे मैं तो ऐसे ही कह रही थी।” निधि ने चापलूसी वाले अंदाज़ में कहा__”और वैसे भी मैं आपकी जान हूॅ न? आप अपनी जान के बिना कैसे चले जाएॅगे, हाॅ नहीं तो।”

“कोई कहीं नहीं जाएगा।” गौरी ने कहा__”चुप चाप बैठो दोनो, मैं खाना लेकर आती हूॅ।”

“नहीं नहीं।” निधि ने बच्चों की तरह कूदते हुए इंकार किया__”मुझे आइसक्रीम ही खाना है, हाॅ नहीं तो।”

“हा हा हा इन्हें जाने दो बहन।” जगदीश ने हॅसते हुए कहा__”जाओ बेटे, तुम गुड़िया को आइसक्रीम खिला कर आओ।” 

“भैया आप नहीं जानते हैं।” गौरी ने जगदीश से कहा__”इसे आइसक्रीम की लत फिर से पड़ जाएगी। पहले ये बिना आइसक्रीम के एक दिन नहीं रहती थी। बड़ी मुश्किल से तो इसकी आइसक्रीम छूटी है।”

“एक दिन में कुछ नहीं होता।” जगदीश ने गौरी से कहने के बाद निधि की तरफ मुखातिब हो कर कहा__”और हाॅ बेटी, ज्यादा आइसक्रीम मत खाना। सेहत के लिए अच्छी नहीं होती।”

“जी अंकल।” कहने के साथ ही निधि ने विराज का बाजू पकड़ा और बाहर की तरफ खींचते हुए ले जाने लगी।

………………

दूसरे दिन विराज काॅलेज पहुॅचा। निधि उसके साथ ही थी। हलाॅकि ये उसका काॅलेज नहीं था किन्तु फिर भी उत्सुकतावश वह विराज के साथ ज़िद करके आई थी।

काॅलेज को देखकर दोनो भाई बहन चकित रह गए। विराज की आॅखों में जाने क्या सोच कर आॅसू आ गए जिसे उसने बड़ी ही सफाई से पोंछ लिया था। निधि तो कालेज की खूबसूरती में ही खोई हुई थी।

कुछ देर काॅलेज को देखने के बाद विराज निधि के साथ कालेज के अंदर गया। कालेज में थोड़ी देर इधर उधर घूमने के बाद निधि को विराज ने कालेज की कन्टीन में बैठा कर खुद प्रिंसिपल से मिलने उसके आफिस की तरफ बढ़ गया। 

रास्ते में एक आदमी से उसने प्रिंसिपल का आफिस पूॅछा और आगे बढ़ गया। कुछ देर बाद ही वह प्रिंसिपल के आफिस में प्रिंसिपल के सामने खड़ा था। उसने अपना नाम बताया, हलाॅकि जगदीश ओबराय ने सबकुछ पहले ही सेट कर दिया था। इस लिए विराज को ज्यादा परेशानी नहीं हुई।

सारी फारमेलिटी पूरी करने के बाद तथा अपने कोर्स से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारी लेने के बाद वह प्रिंसिपल के आफिस से बाहर आकर कालेज की कन्टीन की तरफ बढ़ गया। कन्टीन से निधि को साथ लेकर वह कालेज से बाहर आ गया।

“तो आख़िर आपको आपके पसंद का काॅलेज मिल ही गया न भइया?” रास्ते में बाइक पर पीछे बैठी निधि ने विराज से सट कर तथा विराज के कान के पास मुह ले जाकर बोली__”एक ऐसा काॅलेज जिसमें पढ़ने की कभी आपने तमन्ना की थी, और आज जब आपकी तमन्ना पूरी हुई तो आपकी आॅखों से आॅसू छलक पड़े। है न ?”

“न नहीं तो।” बाइक चला रहा विराज निधि की बात पर बुरी तरह चौंका था, बोला__”ऐसा कुछ नहीं है।”

“आप समझते हैं कि।” निधि ने कहा__”मुझे कुछ पता ही नहीं चला जबकि मैंने अपनी आॅखों से देखा भी और दिल से महसूस भी किया।”

“बहुत बड़ी बड़ी बातें करने लगी है गुड़िया।” विराज ने हॅस कर कहा__”ऐसी जैसे कि कोई सयाना हो जाने पर करता है।”

“हाॅ तो मैं बड़ी हो गई न।” निधि ने भोलेपन से कहा__”आपने देखा था न उस दिन? मैं आपके कंधे से थी, और अब कुछ दिन बाद आपके काॅन से भी हो जाऊॅगी..देख लीजिएगा, हाॅ नहीं तो।”

“हाॅ तू तो कुछ दिन में मेरे सिर के ऊपर से भी निकल जाएगी गुड़िया।” विराज ने हॅसते हुए कहा।

“मुझे ऐसा क्यों लगता है जैसे ये कह कर आपने मेरा मज़ाक उड़ा दिया है?” निधि ने सोचने वाले भाव से कहा__”और अगर ऐसा ही है तो बहुत गंदे हैं आप। जाइए नहीं बात करना अब आपसे, हाॅ नहीं तो।”

“अरे ये क्या बात हुई गुड़िया??” विराज बुरी तरह हड़बड़ा गया।

“बात मत कीजिए अब।” निधि जो अब तक विराज से चिपकी हुई थी अब पीछे हट गई, फिर बोली__”वैसे तो बड़ा कहते हैं कि मैं आपकी जान हूॅ, और अब अपनी ही जान का मज़ाक उड़ा रहे हैं, हाॅ नहीं तो।”

“अच्छा बाबा ग़लती हो गई।” विराज ने खेद भरे स्वर में कहा__”क्या अपने भइया को माफ़ नहीं करेगी गुड़िया??”

“अब आप माफ़ी मत माॅगिए।” निधि तुरंत ही खिसक कर विराज से फिर चिपक गई__”मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगता।”

“तू सचमुच मेरी जान है गुड़िया।” विराज ने भावुक होकर कहा__”तेरी एक पल की भी बेरुखी मैं सह नहीं सकता। मुझसे अगर कोई ग़लती हो जाए तो तू मुझे उसकी सज़ा दे देना लेकिन न ही कभी मुझसे नाराज़ होना और न ही ये कहना कि मुझसे बात नहीं करना।”

“भइया…।” निधि की रुलाई फूट गई, उसने अपने दोनो हाॅथ विराज के दोनो साइड से निकाल कर विराज के पेट पर कस लिया। फिर बोली__”आपसे नाराज़ होकर या आपसे बात न करके क्या मैं भी एक पल रह पाउॅगी? अगर मैं आपकी जान हूॅ तो आप भी तो मेरी जान हैं भइया।”

“चल अब तू रो मत गुड़िया।” विराज ने माहौल को बदलने की गरज से कहा__”हम दुकान के पास आ गए हैं। यहां पर मुझे कुछ किताबें वगैरा लेनी हैं। तू बता तुझे क्या चाहिए?”

“मुझे न।” निधि ने खुशी से कहा__”मुझे न एक टच स्क्रीन वाला मोबाइल लेना है और हाॅ आप भी टच स्क्रीन वाला मोबाइल ले लीजिए। ये की-पैड को अब रिटायर कर दीजिए, हाॅ नहीं तो।”

“क्यों अच्छा तो है ये मोबाइल।” विराज ने कहा__”इसमें क्या खराबी है भला? तुझे पता है इसकी बैटरी हप्तों तक चलती है।”

“मैं कुछ नहीं जानती।” निधि ने कहा__”मैंने कह दिया है कि लेना है तो लेना है बस, हाॅ नहीं तो।”

“अब तो लेना ही पड़ेगा।” विराज ने मुस्कुरा कर कहा__”मेरी गुड़िया, मेरी जान ने कह दिया है तो।”

“हाॅ नहीं तो।” निधि खुश हो गई।

“चलो पहले मोबाइल ही ले लेते हैं।” विराज ने कहा__”उसके बाद किताबें खरीद लूॅगा।”

ये कह विराज ने बाइक को मोबाइल स्टोर की तरफ मोड़ लिया। लगभग पाॅच मिनट बाद ही वो दोनो मोबाइल स्टोर में थे।

“गुड़िया।” विराज ने धीरे से कहा__”किस कंपनी का लेना है मोबाइल और कितने रुपये वाला??”

“मैं क्या बताऊॅ?” निधि ने भी विराज की तरह धीरे से ही कहा__”मुझे इस बारे में तो वैसे भी कुछ नहीं पता।”

“फिर अब क्या करें??” विराज ने कहा__”ये तो कमाल ही हो गया गुड़िया। मोबाइल खरीदने आ गए हैं लेकिन हमें यही पता नहीं है कि कौन सी कंपनी का तथा कितने रुपये तक का मोबाइल लेना है?”

“दुकान वाले से पूॅछ लेते हैं न।” निधि ने बुद्धि दी__”उसे तो सब कुछ पता ही होगा।”

“अरे हाॅ गुड़िया।” विराज ने अपने सिर में हाॅथ की थपकी लगा कर कहा__”ये तो मैने सोचा ही नहीं था। अच्छा हुआ तुमने बता दिया वर्ना यहाॅ से वापस जाना पड़ता। है न???”

“अब ज्यादा ड्रामा मत कीजिए।” निधि ने हॅस कर कहा__”मुझे पता है आप बुद्धू बनने का नाटक कर रहे हैं।”

“मतलब तूने पकड़ लिया??” विराज मुस्कुराया।

“और नहीं तो क्या।” निधि हॅसी__”सरलाॅक होम्स एक ज़माने में हमसे जासूसी की ट्रेनिंग लेने आता था, हाॅ नहीं तो।”

“एक्सक्यूज़मी सर।” तभी सहसा उन लोगों के पास शोरूम का एक ब्यक्ति आकर बोला__”व्हाट कैन आई हेल्प यू??”

“हमें किसी अच्छी कंपनी का सबसे अच्छा मोबाइल या आईफोन दिखाइए।” विराज ने उस ब्यक्ति से कहा। 

उस ब्यक्ति ने आज के चलन के हिसाब से कई तरह के मोबाइल लाकर टेबल पर रख दिया तथा उन डिब्बों पर लिखी बातों को बता बता कर मोबाइल फोन की खासियत बताने लगा। फिर उसने आईफोन के कुछ सेट दिखाने लगा।

लगभग आधे घंटे बाद दोनो ही शोरूम से बाहर निकले। उन दोनों के हाॅथ में एक एक मोबाइल था।

“भइया आप मुझे सिखा दीजियेगा कि कैसे चलाते हैं??” निधि ने रास्ते में कहा।

“ठीक है गुड़िया।” विराज ने कहा__”चल अभी किताबें भी लेना है।”

“वैसे आपका काॅलेग कब से शुरू होगा?” निधि ने पूॅछा।

“एक हप्ते बाद।” विराज ने कहा।

“भइया मुझे भी आपके साथ इसी काॅलेज में पढ़ना है।” निधि ने कहा।

“अगले साल से तू भी इसी कालेज में आ जाना।” विराज ने कहा।

ऐसी ही बातें करते हुए दोनो बहन भाई बाइक से घर पहुॅच गए। विराज अपने मन पसंद कालेज में पढ़ने से बेहद खुश था। मगर वह नहीं जानता था कि अब आगे क्या होने वाला था??????

दोस्तो, अपडेट हाज़िर है,,,

आप सबकी प्रतिक्रिया का इन्तज़ार रहेगा,,,,,,,

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