भाग 6
राजनाथ रूम के अंदर अपनी बेटी के बारे मे यह इमेजीन करते हुए कि वो बीना कपड़े की बिल्कुल इन्हीं लड़कियों की तरह दिखती होगी यह सब सोचते हुए वह अपने लंड से महिनो का जमा हुआ गाढा़ स्पर्म निकाल देता है जो एकदम घी की तरह जमा हुआ था उसके बाद उसने अपने लंड को कपड़े से पोछा जो अभी भी उसी तरह तन कर खड़ा था फिर उसने अपना पैजामा ऊपर चढ़ा के नाडा बांधा फिर वह अपना स्पर्म लेकर बाहर आने के लिए खड़ा हुआ तो उसको ख्याल आया कि उसकी बेटी तो रूम के बाहर बैठी हुई है बेटी का ख्याल आते ही अब उसको अंदर ही अंदर शर्म आने लगा कि अभी जो कुछ भी उसके बारे में सोच कर किया वह गलत था मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था खैर अब जो कुछ होना था वह हो चुका है आगे से मुझे ध्यान रखना पड़ेगा राजनाथ इधर यह सब सोच रहा था।
और उधर आरती बाहर बैठी यह सोच रही है कि बाबूजी को अंदर गए हुए 15 मिनट हो गए हैं और अभी तक बाहर नहीं आए हैं अंदर क्या कर रहे हैं तभी राजनाथ अंदर से दरवाजा खोल के धीरे से बाहर आता है वैसे ही दोनों बाप बेटी की नजरे एक दूसरे से मिलती है और दोनों शर्मा जाते हैं फिर राजनाथ ने आरती से कहा कि अभी तक बैठी हो मैंने तुमको नीचे जाकर बैठने के लिए बोला था।
तो आरती ने धीरे से जवाब दिया कि मैं नीचे जाकर अकेली क्या करती इसलिए मैं यही बैठी हुई थी।
फिर राजनाथ ने कहा कि ठीक है अब चलो फिर दोनों सीढी़ से उतरकर नीचे जाने लगे तो राजनाथ अपना स्पर्म हाथ में पकडे़ हुए आरती से पूछा कि इसको कहां देना है तो आरती ने जवाब दिया की नर्स को जाकर देना पड़ेगा फिर राजनाथ में इधर-उधर नजर दौड़ा कर देखा और बोला की नस कहां पर है।
तो आरती ने बोला कि वह शायद अंदर बैठी होगी आप इसको मुझे दीजिए मैं देख कर आती हूं।
तो राजनाथ अपना स्पर्म उसके हाथ में दे देता है।
फिर आरती उसको अपने हाथ में लेकर जाने लगती है और अंदर जाकर देखती हैं तो नर्स वहां पर नहीं थी तो वह वहीं पर खड़ी होकर इंतजार करने लगती है तभी उसको अपने हाथ में गरम-गरम महसूस होता है क्योंकि उसका बाप का वीर्य अभी भी हल्का-हल्का गर्म था तो वह उसे ऊपर उठा कर देखती है तो शर्मा जाती है और सोचती है कि बाबूजी ने इतना सारा वीर्य एक ही बार में निकाला है ।
तभी नर्स वहां पर आ जाती है पूछती है कि क्या बात है।
तो आरती स्पर्म का डब्बा उसको देते हुए कहती है कि यह लीजिए आपने जो मांगा था।
फिर नर्स उसको अपने हाथ में लेकर ऊपर उठा कर देखती है तो बोलती बोलती है कि इतना सारा यह एक बार का है कि दो-तीन बार का।
तो आरती जवाब देती है कि जी एक ही बार का है।
तो नर्स बोलती है कि मैंने आज तक किसी मर्द को इतना सारा स्पर्म एक ही बार में निकालते हुए नहीं देखी फिर वह बोलती है कि अगर औरत में कोई कमी नहीं होगी और वह औरत आपके पति के साथ सोएगी तो एक ही बार में आपका पति उसको प्रेग्नेंट कर देंगा।
यह बात सुनते ही आरती शर्मा जाती है और मन ही मन सोचती है कि मेरा पति काश मेरा पति ऐसा होता फिर वह वापस राजनाथ के पास आती है तो राजनाथ पूछता है कि दे दिया नर्स को तो आरती जवाब देती है कि जी हां दे दिया तो राजनाथ बोलता हैं कि ठीक है अब घर चलते हैं 2 दिन के बाद फिर आना पड़ेगा फिर दोनों बाप बेटी अपने स्कूटर पर बैठकर घर आने लगते हैं और आते हुए रास्ते में उन्होंने कोई बातचीत नहीं की फिर दोनों घर पहुंचते हैं तब तक शाम हो चुकी थी फिर आरती शाम का खाना बनाने में लग जाती है और राजनाथ नहाने के लिए चला जाता है फिर नहा के आता है तो उसकी मां पूछती है कि डॉक्टर के पास गया था तो क्या बताया उसने तो राजनाथ अपनी मां से बोलता है कि अभी कुछ नहीं बताया जांच करने के बाद बताएगा की क्या हुआ है फिर हम लोगों को 2 दिन के बाद बुलाया है फिर हम लोग जाएंगे तो दवा देगा।
तभी आरती उधर से आई और बोली कि बाबूजी खाना बन गय आप लोगों के लिए खाना लगा दूँ।
तो राजनाथ बोलता है हां बेटा खाना ले आओ भूख बड़ी जोर से लगी और थकान भी लग रही है आज जल्दी सो जाऊंगा।
फिर आरती खाना लेकर आती है और दोनों मां बेटा खाना खाते हैं और खाने के बाद सोने के लिए चले जाते हैं।
उसके बाद आरती भी खाना खाती है और बर्तन समेट कर दादी के रूम में जाती है सोने के लिए दादी अभी तक जाग रही थी तो वह दादी का पैर दबाने लगती है तो दादी बोलती है कि मेरा पैर मत दबाव जाओ जाकर अपने बाप का पैर हाथ दबा दे आज बोल रहा था कि उसको थकान महसूस हो रही है और सुन खाली दबाने से उसकी थकान नहीं जाएगी एक कटोरी में सरसों का तेल गर्म करके उससे उसकी मालिश करेगी तो उसका थकान मिट जाएगा जा जाकर उसकी मालिश कर दे।
फिर आरती अपने मन मे बातें करते हुए कहती है की थकान तो लगेगी उतना सारा माल जो निकला है यह सोचते ही शर्मा जाती हैं और सोचती है कि यह सब तो उन्होंने मेरे लिए ही किया है तो उनका थकान भी मुझे ही मिटाना पड़ेगा और वह एक कटोरी में सरसों का तेल लेकर अपने आप की कमरे की तरफ जाने लगती है।
उधर राजनाथ आज हॉस्पिटल में क्या-क्या हुआ उसके बारे में सोच रहा होता है और यह सोचकर उसको गिल्टी भी फील होता है कि यह सब अपनी बेटी के बारे में नहीं सोचना चाहिए था दूसरी तरफ उसके मन में यह भी आता है कि आज जो कुछ भी हुआ वह मेरे बस में नहीं था तभी दरवाजे के बाहर आरती की आवाज सुनाई देती है और कहती है बाबूजी बाबूजी सो गए हैं क्या तभी राजनाथ को कुछ समझ में नहीं आता है क्या जवाब दे तो वह चुपचाप मटिया देता है और सोने का नाटक करने लगता है।
उधर आरती फिर से आवाज लगती है बाबूजी बाबूजी दरवाजा खोलिए तो उसको कुछ जवाब नहीं मिलता तो वह दरवाजा को हल्का सा धक्का देती है तो दरवाजा खुल जात तो वह सोचती है कि शायद बाबूजी सो गए हैं।
तो वह धीरे-धीरे अंदर आती है और बेड के पास जाकर आवाज देती है बाबूजी लेकिन राजनाथ कुछ नहीं है क्योंकि वह जानबूझकर सोने का नाटक कर रहा है तभी आरती एक बार फिर उसको उठाने की कोशिश करती है और एक हाथ से उसका पैर पकड़ कर हिलाती है तभी राजनाथ जागते हुए कहता है हां के तो आरती रहती है बाबूजी मैं हूं।
तो राजनाथ– उसको देखते हुए कहता है बेटा तू यहां क्या कर रही है कुछ काम है क्या।
तो आरती बोलती है कि काम कुछ नहीं आपका पैर और हाथ दबाने के लिए आई हूं।
तो राजनाथ बोलता है अरे बेटा आज रहने दे मुझे नींद आ रही है और तू भी थक गई होगी जा तू भी जाकर सो जा।
तो आरती बोलती है कि ज्यादा देर नहीं लगाऊंगी बस थोड़ी देर में हो जाएगी।
फिर राजनाथ उसको देखते हुए पूछता है कि ए तुम्हारे हाथ में क्या है।
तो आरती जवाब देती है कि इसमें सरसों का तेल है।
तो राजनाथ फिर से पूछता है कि सरसों का तेल किस लिए।
तो आरती जवाब देती है कि आपका मालिश करने के लिए दादी बोल रही थी कि सरसों के तेल मालिश करने से थकान मिट जाती है।
तो राजनाथ बोलता है कि बेटा मुझे कोई थकान नहीं है तू जा जाकर सो जा तो आरती बोलता है कि बाबूजी आप क्यों जीद कर रहे हैं आप जानते हैं कि मैं आपका मालिश किए बगैर मैं यहां से नहीं जाऊंगी।
तो राजनाथ बोलते हैं कि ठीक है जो करना है जल्दी कर तो राजनाथ पजामा पहन के सोया हुआ था तो आरती आरती ने कहा बाबूजी पजामा उतरना पड़ेग नहीं तो मालिश कैसे करूंगी आपके पजामे में तेल लग जाएगा।
तो राजनाथ मुस्कुराते हुए उसको बोलता है कि तू मेरा थकान मिटाने आई है या थकान बढ़ाने आई तो आरती भी मुस्कुरा देती है और बोलती है कि आप जो भी समझ लीजिए फिर राजनाथ बेड से उठाते हुए बोलता है कि बाहर मेरा डोरी वाला हाफ पैंट रखा हुआ है उसको लेकर आओ।
फिर वह कमरे से बाहर जाती है और पैंट लेकर आती है और राजनाथ को देती है और कहती है यह लीजिए आपका पैंट जल्दी से चेंज कर लीजिए और बोलती है कि मुझे भी आज नींद आ रही है।
तो राजनाथ बोलता है कि इसीलिए तो बोल रहा हूं कि आज रहने दे और जा जाकर सो जा आज तू भी थक गई है।
तो आरती बोलती है कि मेरे से ज्यादा तो आज आप थके हुए हैं क्योंकि आज आपने मेरे से ज्यादा मेहनत की है।
तो राजनाथ बोलता है कि मैने क्या ज्यादा मेहनत की है।
तो आरती बोलती है कि क्या मेहनत की है आपको पता नहीं है।
तो राजनाथ बोलता हैं कि नहीं मुझे तो पता नहीं है की मैंने ऐसा क्या किया है।
तो आरती मुस्कुराते हुए कहती है कि अच्छा आपको पता नहीं है तो ऊपर वाले कमरे में घुस कर 20 मिनट तक अंदर क्या कर रहे थे।
तो राजनाथ भी उसकी बात सुनकर मुस्कराने लगता है और बोलता हैं वो तो मैं अपना काम कर रहा था।
तो आरती मुस्कुराते हुए बोलती है कि जो काम आप कर रहे थे क्या वह काम बिना ताकत लगाए ही हो जाता है।
तो राजनाथ मुस्कुराते हुए सोचता हैं कि जब मेरी बेटी को यह सब बातें करने में शर्मा नहीं रही हैं तो फिर मैं इतना क्यों शर्मा रहा हूं फिर बोलता है कि तुम्हें कैसे पता कि उस काम को करने के लिए ताकत लगाना पड़ता है।
तो आरती ने जवाब दिया कि मैं कोई बच्ची नहीं हूं कि मुझे पता नहीं है कि उसमे ताकत लगता है कि नहीं लगता है और बिना ताकत लगाए ही उतना सारा फल मिल गया मेरा मतलब निकल गया।
तो राजनाथ बोलता है कि उतना सारा फल मतलब मैं समझा नहीं कि तुम क्या कहना चाह रही हो की उतना सारा फल।
तो आरती बोली और नहीं तो क्या मैं जब नर्स को देने गई तो बोल रही थी ।
तो राजनाथ ने पूछा क्या बोल रही थी।
तो आरती बोली नर्स बोल रही थी कि इतना सारा एक बार का है कि दो-तीन बार का है।
राजनाथ- फिर तुमने क्या कहा।
आरती- मैं बोली की जी एक ही बार का है।
राजनाथ– मुस्कुराते हैं तुम्हें कैसे पता कि वह एक ही बार का है।
आरती- मुझे पता है क्योंकि उतनी देर में एक ही बार निकल सकता है।
राजनाथ– अछा
आरती- और नहीं तो क्या
अब बाप बेटी और धीरे-धीरे खुल रहे थे फिर राजनाथ ने आरती से पूछा कि नर्स और क्या बोल रही थी।
तो आरती ने कहा कि और बोल रही थी लेकिन वह मैं आपको नहीं बता सकती।
फिर राजनाथ ने पूछा क्यों ऐसा क्या बोल रही थी कि मुझे नहीं बता सकती।
आरती- क्या आप सुनना चाहते हैं
राजनाथ– हां अगर मेरे बारे में बोली है तो मैं नहीं सुनूंगा तो और कौन सुनेगा।
आरती शरमाते हुए ठीक है बताती हूं वह बोल रही थी कि जो मर्द एक बार में इतना सारा स्पर्म निकालेगा तो जो औरत एकदम ठीक रहेगी उसको तो एक बार में ही प्रेग्नेंट कर देगा यह बोलते ही आरती शर्मा गई और अपनी नज़रें नीचे कर ली यह देखते हुए राजनाथ में फिर उसको पूछा फिर तुम उसको क्या बोली तो आरती शरमाते हुए बोली कि मैं उसको क्या बोलती मैं कुछ नहीं बोली।
और मैं बोलती भी क्या कि मेरे पति का नहीं मेरे बाप का स्पर्म है इसलिए मैं कुछ नहीं बोली।
आगे की कहानी अगले भाग में।

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